Friday, December 29, 2023

Class Date: 18-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 29&30
Paragraph #: 4
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Summary:

एक शब्द में उत्तर दें-


1. जीव के साथ सबसे लंबे समय से क्या है?

उ. ज्ञान स्वभाव

2. जीविका कर्म के साथ कैसा संबंध है?

उ.संकलिष्ट

3. कर्म के फल आने को क्या कहते हैं?

उ.उदय

4. कर्मफल देने के बाद क्या बन जाता है?

उ.अकर्म

5. बंधे हुए समय के पूर्व कर्म का उदय आना क्या कहलाता है?

उ. अपकर्षण

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए-


1. हम ------ लेकर आए हैं —--- को लेकर जाएंगे

उ. मिथ्यतव,सम्यक्त्व

2. गुरु के निमित्त से —---- के द्वारा ज्ञान होता है।

उ.स्वयं

3. कर्म का उदय आता है तब स्वयंमेव —---------------- के अनुसार कार्य बनता है।

उ.प्रकृति,स्थिति,अनुभाग

4. कर्म —------ हो के कार्य नहीं करता।

उ.कर्ता

5. फल सहित निर्जरा जिस अनुसार बंदा था वैसी निर्जरा होना —----- निर्जरा है

उ.विपाक

सही गलत में उत्तर दीजिए-


1. कर्म जिस समय बांधा जाता है इस समय उसके फल देने का समय निश्चित हो जाता है?

उ.सही

2. कर्म का उदय बंधे हुए समय के पूर्व नहीं आ सकता है?

उ.गलत

3. कर्म जीव का कर्ता है?

उ.गलत

4. अकर्म होने के बाद कर्म के पुद्गल परमाणु किसी और रूप बन सकते हैं?

उ.सही

5. कर्म के उदय अनुसार भावों का ना होना अविपाक निर्जरा है।

उ.सही

Notes Written By Neha Gangwal.


Class Date: 21-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 31
Paragraph #: 1 
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Summary:


नोकर्म =किंचित (इशत)= अर्थात अस्तित्व तो है परन्तु थोड़ा है  
1= जो कर्म के सामान है परन्तु कर्म जैसा gyana varan रूप नहीं है जो कर्म में मुख्यता से शरीर है

2= कर्म के जैसा सुख दुःख देता है

3=.कर्म का मित्र है कर्म को बुलाता है आत्मा को नहीं

4= पूरा शरीर आदि जो भी हैं और इसके जो हिस्से हैं जो पुद्गल परमाणु के पिण्ड हैं और इसके निमित्त से जो भी हो रहा है वह भी पुद्गल के पिण्ड हैं इसका सम्बन्ध आयु कल प्रमाण रहता है इसका सम्बन्ध जीव के साथ में एक क्षेत्र अवगाहा संश्लिस्ट सम्बन्ध पाया जाता है

इन्द्रिय= स्पर्शन,रसना,आदि पञ्च इन्द्रिय

नो इन्द्रिय =  मन ( इंद्रियों की भांति नहीं है परन्तु इंद्रियों की तरह ही कार्य करती है )

रिक्त स्थान भरो -


1.= कर्म ____है और जीव  का परिणाम____हे परन्तु जो कार्य है वह कर्म नहीं वह भाव कर्म है द्रव कर्म नहीं है

Ans- कारण ,कार्य

2=जैसे पुद्गल द्रव्य _____ मैं निमित्त बनता है, वैसे ही शरीर भी ______में निमित्त बनता है

Ans-सुख दुःख ,सुख दुःख

3= शरीर नाम कर्म का उदय_____ नहीं होता लगातार होता है

Ans- कम ज्यादा

4= हमारे ____ बेजान है है सिर्फ उसमें _____ की जान है यानि वचन पौद्ग ग्लिक है है वचन शरीर के अंग से पृथक है

Ans- वचन ,राग द्वेष

5=कर्म का सम्बन्ध _______ हो सकता है परन्तु शरीर का सम्बन्ध ______होता है

Ans- 70 कोड़ा कोडी सागर ,33 सागर

1) जीव द्रवकर्म के साथ वाला होगा तो ही शरीर होगा

2) एक वस्तु के टुकड़े कभी नहीं होते हैं यदि शरीर के हिस्से हो रहे हैं तो वह पिंड है 

Notes Written By Rashmi Jain.

Class Date: 19-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 30
Paragraph #: 1 
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Summary:

Short answer type question:-


Q.1 एक समय में कितने परमाणु बंधते हैं?

उत्तर :--एक समय प्रबद्ध 

Q.2 एक समय प्रबद्ध में कितने परमाणु होते हैं?

उत्तर- (i) अभव्य X अनंतगुणा
         (ii) सिद्ध राशि/अनंत भाग

Q.3 क्या एक समय में बंधे परमाणु अगले समय से ही उदय में आने लगते हैं?

Ans- नहीं, अगले समय से ही उदय में नहीं आते। आबाधा काल को छोड़ कर उदय में आते है।

Q.4 क्या परमाणुओं के उदय में आने का कोई क्रम हैं?

उत्तर- हाँ एक समय में बंधे हुए परमाणु आबाधा काल को छोड़कर अपनी स्थिति के जितने समय हैं उतने समय में फैल जाते हैं, फिर क्रम से उदय में आते हैं।

Q.5 आबाधा काल किसे कहते है?

उत्तर- प्रतिसमय बंधे परमाणु एक निश्चित समय तक उदय में नहीं आते, वही समय सीमा आबाधा काल कहलाती है।

Q.6 आयु कर्म की आबाधा की किस प्रकार गणना की जाती हैं?

उत्तर- जिस समय जीव अगले भव की आयु बांधता है उसके अगले समय से लेकर वर्तमान भव की उसकी जो आयु शेष है वह उस जीव की आयु कर्म की आबाधा होती है।

Q.7 एक कोड़ाकोड़ी वर्ष स्थिति वाले कर्म की आबाधा कितनी होती है।

उत्तर-100 वर्ष

Q.8 क्या एक समय में एक ही प्रकार के कर्म उदय में आते हैं?

उत्तर- नहीं; बहुत समयों में बँधे अनेक कर्मों के परमाणु जो कि एक समय मे उदय आने योग्य हैं , इकट्ठे होकर उदय में आते हैं।

बहुविकल्पी:-


1: एक समय मे कितने परमाणु बंधन को प्राप्त होते हैं?

(A) संख्यात
(B) असंख्यात
(C)अनंत ✅
(D) कोई नहीं

2. जीव को प्रतिसमय एक समय प्रबद्ध जो परमाणु बंधते है उनका क्या कारण है?

A) योग ✅
(b) कषाय

3. कौन सी कर्म प्रकृति में आबाधा काल का सामान्य नियम घटित नहीं होता है?

(a) ज्ञानावरण
(b) दर्शनावरण 
(c) आयु ✅
(d) नाम

4. जिस जीव ने अगले भव की आयु बाँध ली हो क्या उस जीव के कदलीघात मरण संभव है?

(a) हाँ
(b) नहीं✅
(c) शायद
(d) पता नहीं

हाँ या ना में उत्तर दें!

1. मनुष्यों की संख्या स्थिर है।

Ans- नहीं'
२. जितनी लंबी कर्म की स्थिति उतना बड़ा आबाधा काल होता है।

Ans-हां

3.भव्य जीवों की संख्या कम होती रहती है।

Ans- हाँ

4. अभव्यों की संख्या कम बढ़ नहीं होती है।

Ans- हाँ

Notes Written By Nidhi Jain.

Class Date: 23-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 31
Paragraph #: 1,2,3
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Summary:

सही /गलत


1.जीव के आत्म प्रदेशों मे संकोच और विस्तार की शक्ति पाई जाती है 

Ans-(V)

2.विग्रह गति के समय जीव के नोकर्म होता है 

Ans- (X)

3.नाम कर्म के निमित्त से शरीर प्राप्त होता है 

Ans- (V)

4. विग्रह गति के समय जीव अपने पूर्व शरीर जो छोड़ा है, उस आकार रुप रहता है 

Ans- (V)

5. जीव को जिस प्रकार का शरीर प्राप्त होता है, उतने स्थान मे उसके प्रदेश रहते है 

Ans- (V)

6. जीव असंख्यात प्रदेशी है 

Ans- (V)

7. द्रव्यइन्द्रिय द्रव्यमन, वचन और श्वासोच्छवास आदि शरीर के अंग नहीं है 

Ans- (X)

8. आत्म प्रदेशों के संकुचित और विस्तृत रहने से जीव के सुख, दुःख का कोई संबंध नही है 

Ans- (V)

9. आत्मा यद्यपि असख्यात प्रदेशी है, तो भी संकोच, विस्तार शक्ति से शरीर प्रमाण ही रहता है 

Ans- (V)

10. अधिकतम तीन समय विग्रहगति मे जीव अनाहारक रह सकता है 

Ans- (V)

11.जीव के जन्म समय से लेकर जितनी आयु की स्थिति हो, उतने काल तक शरीर और आत्मा का संबंध रहता है 

Ans- (v)

खाली स्थान


1.काल की सबसे छोटी ईकाई.....है।

उत्तर - समय

2. जीव का एक गति से दूसरी गति मे जाने के बीच के अन्तराल को...... कहते है।

उत्तर- विग्रहगति

3. विग्रह गति मे ....मोडे होते हैं

उत्तर- तीन

 4. नोकर्म मे नो शब्द का अर्थ.... होता है। 

उत्तर -अल्प (थोडा)

5. मूल शरीर को छोड़े बिना आत्मा के प्रदेशों का शरीर से बाहर निकलना, उसे .....कहते है

उत्तर - समुद्धघात

6. शरीर छूटने के बाद अधिकतम.... समय मे जीव नवीन शरीर धारण कर लेता है

उत्तर- चार

Notes Written By Kritika Jain.

Class Date: 25-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 31
Paragraph #: 2 
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Summary:

रिक्त स्थान भरो 


① आत्मा----------- प्रदेशी है।

उत्तर- असंख्यात

② संकोच - विस्तार शक्ति से-------ही रहता है!

उत्तर - शरीर प्रमाण

③ इस शरीर के अंगभूत------और------उनकी सहायता से जीव के जानपने की प्रवृत्ति होती है!

उत्तर -द्रव्य इन्द्रिय, मन

④ शरीर की अवस्था के अनुसार---------से जीव सुखी दुखी होता है

उत्तर-मोह के उदय

5- एक शरीर छूटकर दूसरा शरीर मिलने काअंतराल------- रहता है।

उत्तर - 3 समय

सही गलत बताइये


1-• कर्म की प्रकृति से भगवान को भी दुस्वरकर्म होता है।

 उत्तर- सही

2-• भगवान के शरीर का आकार हुण्डक नही हो सकता है।

उत्तर - गलत

③ इन्द्रिया मतिज्ञान के लिए निमित्त है।

उत्तर सही

④ द्रव्यकर्म घाति और आघाति रूप से दो प्रकार के हैं।

उत्तर - सही

⑤ शरीर की अवस्था के अनुसार जीव की प्रवृत्ति जीव की दशा भी देखी जाती है

उत्तर -सही

6- कमी जीव अन्यथा, इच्छा रुप प्रवर्तता है । और पुद्गल अन्यथा रुप प्रवर्तता है। 

7-आत्मा शरीर प्रमाण रहता है । नख और केस को छोड़कर

उत्तर-सही

प्रश्न उत्तर


प्रश्न 1 -द्रव्यकर्म किसे कहते है?

उत्तर- ज्ञानावरणादिक आठ कर्मों का पिंड समूह को द्रव्यकर्म कहते हैं।

प्रश्न 2- नौकर्म किसे कहते है ?

उत्तर-जो यह शरीर बना है ।नाम कर्म की निमित्त से उसका नाम है नौकर्म। 

प्रश्न 3-शरीर का और ज्ञान का क्या सम्बन्ध है?

उत्तर- जो इंद्रिया है वह ज्ञान की बहिरंग निमित्त है। लेकिन इन्द्रिया ज्ञानात्मक नहीं है। इंद्रिय और ज्ञान का कर्ता कर्म संबंध नहीं है निमित्त नेमैतिक संबंध है। अधूरी दशा में, जब तक जीव पूर्ण ज्ञान रूप परिणत नहीं हो जाता है ।तब तक इंद्रियों की सहायता लेता है। इंद्रियों के निमित्त से ज्ञान करता है।

Notes Written By Priyanka Godha.

Class Date: 14-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 28
Paragraph #:
YouTube link: https://www.youtube.com/live/8YydMEvaWew?si=F0YdvynMiE2rhtT3
Summary:

रिक्त स्थानो की पुर्ति करिए :-


1) बंध का मुख्य कारण ..... होता है! 

उत्तर :-कषाय

२) जो चेतना रहित है वह.....है! 

उत्तर - जड़ 

3) कर्म चेतना रहित है परंतु उसका फल आता है क्योकि उनका....संबंध होता है। 

उत्तर→निमित नैमित्तिक

4)एक बार में बाँधे सभी कर्म की .......एक जैसी नहीं होती है।

उत्तर -शक्ति, 

5)कर्म को चारो प्रकार से बधने में .......का निमित है और जो कार्य हो रहा है वह नैमितिक है! 

उत्तर-जीव के परिणामों

एक शब्द में उत्तर दीजिए:-


1 )योग द्वार से ग्रहण किय!हुआ कर्म -वर्गणारूप पुद्‌गल पिण्ड
किस तरह परिणमित होता है।

उत्तर-ज्ञानावरणादिक प्रकृति रूप

2) कई परमाणु किसी प्रकृति में थोड़े और किसी प्रकृति रूप अन्य में ज्यादा परमाणु, यह दर्शाता है:-

उत्तर -प्रदेश 

3) कई परमाणुओं का संबंध बहुत काल और कईयो का थोडे काल रहता है, यह बतलाता है।

उत्तर-स्थिति

Notes Written By Praneeta Jain.

Sunday, December 17, 2023

Class Date: 16-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 28
Paragraph #: 3
YouTube link: https://www.youtube.com/live/v2caZf-1pDY?si=Lf7ySH4ozq2bBS-J
Summary:

fill in the blank


(1 ) गति, जन्म मरण का कारण______ है।

Ans-  (कर्म का फल)

(2) कर्म से छूटना, मतलब कर्म का______ रूप होना है।

Ans- (अकर्म)

(3) सत्व कर्मों में जीव के परिणाम के निमित्त से _______हो सकता है ।  
     
Ans- (बदलाव ) 

(4) कर्म की________का संक्रमण होता है। 

Ans- (प्रकृति)

(5) वैक्रियिक शरीर का संक्रमण _______ में हो सकता है।

Ans- (औदारिक शरीर)

(6) अपकर्षण, उत्कर्षण कर्म के _______ और ______के होते हैं।

Ans- (स्थिति, अनुभाग) 

(7)-_____ कर्म का संक्रमण नही होता है। 

Ans- (आयु)

(8) _______जैन दर्शन की मौलिक विशेषता जो अन्य किसी दर्शन में नहीं पाई जाती । 

Ans- (कर्म की व्यवस्था)

 

सही गलत बताए-

(1) कर्म के फल से शरीर प्राप्त होता है। 

Ans-(सही) 

(२) शरीर के नष्ट होने पर कर्म का नाश हो जाता है।

Ans- ( गलत)

(3) आयु का संक्रमण हो सकता है। 

Ans- (गलत)

(4) कर्म का संक्रमण होने पर उसके थोड़े परमाणु अन्य प्रकृति रूप बदलते हैं।

Ans- (सही) 

(5) पुण्य कर्म के अनुभाग का उत्कर्षण होना बुरा है।

Ans- (गलत)

(6) स्थिति के उत्कर्षन मे स्थिति को बढ़ाते है उसे Postpone नही करते।

Ans- (सही)

बहु वैकल्पिक प्रश्न

(1) जीव के प्रदेशों से बंधे हुए कर्म का संबंध है

(A) एक क्षेत्रावगाह
(B) संयोग
(C)मानसिक
(D) एकक्षेत्रावगाह संश्लिष्ट

उत्तर - ( D) एकक्षेत्रवगाह संश्लिष्ट

(2) वर्तमान आयु का हो सकता है?

(A) संक्रमण
(B) स्थिति का अपकर्षण 
(C) स्थिति का उत्कर्षण
(D) कुछ नही

उत्तर - (B) स्थिति का अपकर्षण.

(3) मनुष्य गति का संक्रमण हो सकता है?

(A) उच्च गोत्र मे
(B) मान कषाय में  
(C)देव गति मे 
(D)साता वेदनीय   

उत्तर - देव गति

प्रश्न के उत्तर दीजिए

प्रश्न-1 सत्ता किसे कहते है?

उत्तर - जीव के प्रदेशों से बँधे हुए कर्मों का एक क्षेत्रावगाह संश्लिष्ट संबंध जब तक कर्म उदय में न आये, कर्म की सत्ता कहलाती है।

प्रश्न-2 संक्रमण क्या है और उसके नियम क्या है?

उत्तर - कर्म की प्रकृति का अन्य प्रकृति रूप होना संक्रमण है।
(1) अपने सजातीय कर्मों मे ही संक्रमित होते हैं।
(२) थोडे परमाणु बदलते है। पूरी प्रकृति नही बदलती
(3) आयु कर्म का संक्रमण नही होता 

प्रश्न-3  मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है-?

उत्तर- मेरे साथ ऐसा फल भोगने वाले अनंतो जीव है, क्योंकि कर्म बंध की दशा हमारी अकेले की नहीं है हर सँसारी जीव की कहानी है। ऐसा जानने से दुख कम हो जाता है । (2) जो हो रहा है वो स्वयं के द्वारा पूर्व में किए गये कर्मो का फल है। स्वयं का अपराध है अन्य या नही ऐसा जानकर कर्म बंधन से मुक्ति का पुरूषार्थ करना चाहिए ।

Notes Written By Vandana Jain.