Tuesday, January 23, 2024

Class Date: 10-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 36 & 37 
Paragraph #: 2 (pg no. 36) , 1 (pg no. 37)
YouTube link: https://www.youtube.com/live/MipHs7yap3k?si=G_I7bHAg9GUr8kPB
Summary:

रिक्त स्थान भरो


1. जिन जिन का _____होता है उनका_____भी होता है इस प्रकार एक जीव को एक कल में एक बार जानना अथवा दर्शन का परिणमन होता है।

Ans-  ज्ञान , दर्शन

2.  उपयोग के परिणमन में______ होती है।

Ans- शीघ्रता

3.  हर वस्तु का प्रत्यक समय मे____  होता है उनका भी ज्ञान होता है।

Ans- परिणमन

4.  वर्तमान का ज्ञान _____जानता हे परंतु परिणमन बहुत ____ होता है।

Ans-  थोड़ा-थोड़ा, जल्दी-जल्दी

5.  इस जीव के देखने के द्वार तो_____ हैं, परंतु उपयोग____ हे । वह एक ज्ञान सब जगह घूमता हे।

Ans-  अनेक , एक

6. जीव का ______ नहीं घूमता हे ,______घूमता है।

Ans-  आत्मा , उपयोग

जीव की शक्ति के प्रकार=

१_ प्रकट शक्ति 
२_ आप्रकट शक्ति
# = १_पूर्ण शक्ति
२_ प्रकट शक्ति
३_ शक्ति का प्रयोग

डिटेल=

१ _प्रकट पर्याय में कितना काम होता है वह शक्ति है

२_ प्रकट पर्याय में यदि चेंज करेंगे तो कितना काम हो सकता है वह शक्ति है।

३_प र्यायमें शक्ति मौजूद नहीं है परंतु यदि हमारे अंतर्गत जो द्रव्य स्वभाव मौजूद हे उसका यदि विकास हो जाए तो जो प्रगट होगा वह शब्द शक्ति।

१_ द्रव्य स्वभावरूप शक्ति
२  _ क्षयोपसम रुप शक्ति
३ _ पर्याय में उपयोग की शक्ति

डिटेल्स= 

१_केवल ज्ञान केवल दर्शन की शक्ति है हमेशा पाई जाती है = द्रव स्वभावरूप शक्ति (अनादि से अनंत काल तक रहने वाली)

२_ वर्तमान मे जो पंचेंद्रीय जाने रूप शक्ति है= क्षयोप्सम रूप शक्ति ( पर्याय) 

३ _क्षयोपसम रूप शक्ति से जो जान पाते है जो यूज कर पाते है वह= पर्याय मे उपयोग रूप शक्ति ( एक बार में एक को जानता है)

विशेष 

संपत्ति ज्यादा है भोग कम है उसी प्रकार पंचेंद्रियओ का क्षयोपसम प्रति समय हमारे पास है, परंतु उपयोग हम एक बार में एक का ही कर सकते है बाकि चार उपयोग मे रहती है।

Notes Written By Rashmi Jain.

Class Date: 11-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 37
Paragraph #: 2 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/jocUfJYSJ6Y?si=kPA2MT1bG6nVX7PI
Summary:

प्रश्न रिक्त स्थान भरो 


① रोग होना-------- का निमित्त है

उत्तर -असाता कर्म

② आंख कान मुंह जो मिले है वह --------के कारण मिले है।

उत्तर-नामकर्म

3 आँख कान नाक का निर्माण ठीक होना -------से होता है ।

उत्तर - निर्माण नामकर्म

4)----------नामकर्म उसके निमित्त से रोगता निरोगता की दशा बनती है।

उत्तर - स्थिर अस्थिर

5) असहाय केवल -------भगवान ही है

उत्तर- केवली.

6)  कर्म के क्षयोपशम का ही विशेष है कि वह------- के बिना नहीं जान पाता ।

उत्तर -वाह्य द्रव्य

 सही गलत बताइये 


① अवधी ज्ञान में एक बार में किसी एक विषय के बारे में जानना होता है। सारे विषयों का युगपत जाना नहीं होता है।

उत्तर -सही

② मन: पर्याय ज्ञान केवल दिगंबर मुनिराज को होता है मोक्ष मार्ग के अंतर्गत होता है!

उत्तर - सही

③ मनः पर्यय ज्ञानी एक बार में अनेक को एक साथ जान पाता है।

उत्तर -गलत

4)ज्ञानावरण कर्म और दर्शनावरण कर्म जीव के लिए हितकारी नहीं है

उत्तर -सही

⑤ कर्म भला है हितकारी है।

उत्तर - गलत

6)• मोहनीय कर्म के अन्तर्गत दर्शन -मोहनीय श्रद्धान का घात करता है।

उत्तर - सही

प्रश्न-उत्तर


प्रश्न 1)मन: पर्यय ज्ञान किसे कहते है?

उत्तर- दृव्य क्षेत्र काल भाव की मर्यादा सहित दूसरे मन में स्थित रूपी पदार्थों को जो बिना किसी की सहायता के सीधे आत्मा से स्पष्ट जानता है उसे मन: पर्यय ज्ञान कहते हैं ।

2) मोहनीय कर्म कितने प्रकार का होता है।

उत्तर - मोहनीय कर्म दो प्रकार का होता है

1) दर्शन मोहनीय ② चारित्र मोहनीय

प्रश्न 3)-दर्शन मोहनीय गुण कौन से गुण का घात करता है?

उत्तर - दर्शन मोहनीय श्रद्धान गुण (विश्वास) के घातने में कारण बनता है।

प्रश्न 4)-चरित्र मोहनीय के निमित्त से क्या होता है?

उत्तर)-चारित्र मोहनीय के निमित्त से कषाय भाव होते हैं ।क्रोध मान माया लोभ के भाव होते हैं।

Notes Written By Priyanka Godha.



Class Date: 13-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार
Page#: 38
Paragraph #: 1 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/kn-jHe9OPws?si=SPOilKoG9h0DtGMv
Summary:

प्रश्न / उत्तर


1) मोहनीय कर्म के कितने भेद होते हैं ?

Ans:- मोहनीय कर्म 2 प्रकार का होता है:-
(ⅰ) दर्शन मोहनीय - पुन: 3 भेद हैं।
(!ⅰ) चारित्र मोहनीय - पुन: 25 भेद हैं।

2) Pg-38 के Paragraph 1 के अनुसार पंडित जी का 'प्रसिद्ध' शब्द से क्या आशय है ? 

Ans:- ' प्रसिद्ध' शब्द का अर्थ 'निरंतर अनुभव में आने वाले गुणों' से है।

3) 'आप' शब्द का भाव क्या है?

Ans:- आप का अर्थ 'स्वयं' से है।

4) 'पर' शब्द का क्या भाव है?

Ans:- स्वयं के अलावा सभी अन्य प्रदार्थ 'पर' हैं।

 True/False


1) श्रद्धान और चारित्र की विपरीतता ही मिथ्यात्व कहलाती है। 
Ans- false

2) वस्तु स्वरुप को जानना और मानना एक ही बात है। 

Ans- false

3) जैसा है वैसा ही मानना मोह है। 

Ans- false

objective Type -


1) मिथ्यात्व परिणाम का फल है:-

# तत्व अश्रद्धान
# अतत्व श्रद्धान 
# दोनो सही✅
# दोनों गलत

2) 'आप' (जीव) के संबंध में इनमें से कौन सा तथ्य सही नहीं है।

#अमूर्तिक प्रदेशों का पुंज
# वर्णादिक वाला ✅
# प्रसिद्ध ज्ञानादिक गुणों का धारी
# अनादि निधन

3) पर (पुद्‌गल) के संबंध में इनमें से कौन सा तथ्य सही नहीं है?

# सुख गुण वाला ✅
# मूर्तिक पुद्‌गलों का पिंड
# ज्ञानादिक गुणों से रहित
# नवीन संयोग से प्राप्त

 Match the following.

a) तत्व अश्रद्धान     1) मैं अमूर्तिक हूं।    (b)
b) तत्व श्रद्धान      2) मैं ज्ञान रहित हूं     (a)
c) अतत्व श्रद्धान    3) मैं मनुष्य ही हूं      (c)

Notes Written By Siddharth Jain.


Class Date: 20-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 38
Paragraph #: 4 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/v-AlJjHYTE4?si=w0xUM4PTh-UtROS2
Summary:

सही गलत लिखिये :-


1. दर्शन मोहनीय और चारित्र मोहनीय, मोहनीय कर्म के प्रकार है।

उत्तर- सही

2- चारित्र मोह से जीव को कषायिक भाव होते हैं।

उत्तर - सही

3- दशर्न मोह से साथ चारित्र मोह होता ही हैं।

उत्तर - सही

 सही विकल्प चुने:-


1. क्रोधादिक भाव या कषाय रूप हैं।

१ - चारित्र मोहनीय 
2- दर्शन मोहनिय 
3- दर्शनावरण

उत्तर - चारित्र मोहनीय

2- इष्ट-अनिष्ट पने का भाव किस कर्म के उदय से होता है। 

1- ज्ञानावरण
2- दर्शन मोहनीय 
3. दर्शनावरण

उत्तर - दर्शन मोहनीय

3. चारित्र मोह रूपी कषाय कितने प्रकार की हैं।

१- चार
2- सात
3- नौ

उत्तर चार

 एक शब्द में उत्तर लिखिए!-


1. किस कर्म के उदय से जीव को कषायिक भाव होते है?

उत्तर- चारित्र मोहनिय

2 - किस कर्म के उदय से वस्तुओ का यर्थाथ ज्ञान नहीं हो पाता?"

उत्तर- दर्शन मोहनीय

3 मोहनीय कर्म कितने प्रकार का होता है?

उत्तर- दो प्रकार के - दर्शन मोहनीय और चारित्र मोहनीय

 निम्न लिखित प्रश्नों के उत्तर दिजिए!


1-चारित्र मोह किसे कहते है?

 उत्तर - जब जीव परवस्तुओं को अच्छा-बुरा मानकर क्रोधादिक कषाय करता हैं उसे चारित्र मोह कहते हैं।

2. चारित्र माह से जीव की अवस्था क्या होती हैं?

उत्तर - चारित्र मोह के उदय में जीव को कषाय रूप परिणाम होते हैं, जिस से जीव दुखी होता है|

3- कषाय किसे कहते हैं?

उत्तर. जो आत्मा को कसे अर्थात दुख दे उसे कषाय कहते हैं।

4- चारित्र मोहनीय कषाय के प्रकार लिखे? -

उत्तर - चारित्र मोहनीय रूप कषाय चार प्रकार की होती है:-

1- अनंतानुबंधी

2- प्रत्याख्यान

3. अत्याख्यान

4. संजव्लन

5- दर्शन, ज्ञानावरण और दर्शन मोहनीय कर्म में अंतर बताओ। 

उत्तर - दर्शन, ज्ञानावरण किसी भी पदार्थ को जान पाने की क्षमता को तय करता है 
दर्शन मोहनीय से पदार्थ का यर्थाथ ज्ञान नहीं होता|
अथवा जीव को विपरीत श्रृद्धान करवाता है। 

6-क्या दर्शन मोहनीय और चारित्र मोहनीय साथ-साथ काम करता है?

उत्तर - चारित्र मोहनीय अकेले हो सकता है लेकिन दर्शन मोहनीय के साथ चारित्र मोहनीय होता ही हैं।

Notes Written By Samta jain.


Class Date: 22-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 38
Paragraph #: last
YouTube link: https://www.youtube.com/live/dqglsTTNlFM?si=61tT5SpFCTAfbwhL
Summary:


 *एक शब्द में उत्तर दें:-* 


1)प्रसिद्ध ज्ञानादिक गुणों का धारी है-

Ans- आत्मा

2) मिथ्यात्व कर्म के अभाव में होता है - 

Ans- सम्यकत्व

3) चरित्र मोहनीय कर्म के उदय से जीव के होने वाले भाव -

Ans-  कषायिक भाव

4)पदार्थो में इष्ट और अनिष्टपना मानकर बुरा चहना, ये होता है 

Ans-  -क्रोध का उदय होने पर
 

*नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर* :-


1) चरित्र मोहनी में किस रूप कर्म होंगे और किस रूप उनका भाव होगा?

 *उत्तर* - चरित्र मोहनी में जिस रूप कर्म का उदय होता है उस ही रूप जीव का भाव भी होगा।

 *जेसे* - क्रोध के उदय में जीव के भाव का क्रोध रूप परिणमन होने लगता है।

2) क्रोध का उदय होने पर जीव के भाव किस प्रकार के होंगे?

 *उत्तर* - क्रोध के उदय में अगर अचेतन पदारथ बुरे लगे तो उन्हें तोड़ने का भाव और सचेतन पदारथ बुरे लगे तो उन्हें बध-बंधन आदि से या मlरने से दुख उत्पन्न करके उनका बुरा चाहता है।

 *हाइलाइट* :- जब जीव विवेक पूर्वक किसी वास्तु का त्याग करके अपना उपयोग बदलता है तो वह क्रोध रूपी भाव नहीं है।


Notes Written By Praneeta Jain.

Monday, January 22, 2024

Class Date: 17-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 38
Paragraph #: 2&3 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/qYQhkRlrves?si=uAwAmFyGOc-7vPye
Summary:

रिक्त स्थान भरो-


(1)______धातु का भाव______, मतलब दो को मिलाकर एक करने रूप मिथ्या भाव है। 

Ans- ( मिथ् , युगल)

② प्राप्त पर्याय में______, ________, ______ तीनो का एकसाथ अनुभव आता है।

Ans- (ज्ञानादिक, रागादिक, वर्णादिक) 

3 क्रोधादिक हास्यादिक भाव_____है, मिटाने लायक है ।

Ans- (बीमारी)     

 4- _________ को ही अपना नही कह रहे फिर शरीर को अपना कैसे कहे।

Ans- (राग द्वेष)

(5) अपने से भिन्न चेतन अचेतन वस्तुओ मे -ये मेरे है, मेरे अनुसार चले ऐसी _______बुद्घि होती है।

Ans- (ममकार)

⑥ मिथ्यात्व के उदय मे _______और ________बुद्धि पाई जाती है।   

Ans- (एकत्व, ममत्व)

7) मिथ्यात्व के नष्ट होने पर_____ठीक हुआ है। बाहरी आचरण वैसा ही रहता ।

Ans- (मानना)

सही गलत बताए-


① ज्ञान कम ज्यादा होना मिथ्यात्व नहीं है। 

Ans- (√)

② हंसना, रोना, गुस्सा आना मिथ्यात्व के उदय से होता है।

Ans-  (X)

3) स्वभाव और परभाव का विवेक नही होना, मिथ्यात्व के उदय से होता है।

Ans- (सही)

④ क्रोधादिक Emotions बीमारी है।

Ans- (सही)

⑤ मिथ्यात्व के नष्ट होने पर गुस्सा नही आता है।

Ans-  (X)

(6)सम्यक दृष्टि फौज में भर्ती नहीं हो सकता है।

Ans- ( X)

(7) मिथ्यात्व कर्म के उदय में स्व पर का विवेक करने पर मिथ्यात्व कर्म छूट जाता है।

Ans- (सही)

(8) मां बाप का मिलना मिथ्यात्व का फल है ।

Ans-  (गलत)

(9) अपने से प्रत्यक्ष भिन्न पदार्थ अपने अनुसार परिणमित नही होते।

Ans- (सही)

⑩ अपने को अनादि निधन मानना भय पैदा होने का कारण है। 
Ans- (X)

प्रश्न उत्तर लिखिए-


 प्रश्न-एकत्व बुद्धि किसे कहते है ?

उत्तर - ज्ञानादिक, रागादिक ,वर्णादिक में एक जैसी अहम् बुद्धि करना एकत्व बुद्धि है। मिथ्यात्व के उदय के कारण है।

प्रश्न- ममत्व बुद्धि किसे कहते है?

उत्तर - अपने से प्रत्यक्ष भिन्न चेतन (कुटुम्बादि)अचेतन (धन, घट) पदार्थों में, ये मेरे हैं' और मेरे अनुसार चलें ऐसी बुद्धि को ममत्व बुद्धि कहते है।

Notes Written By Vandana Jain.

Class Date: 18-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 
Paragraph #:
YouTube link: https://www.youtube.com/live/5_Vk5KpirBk?si=6nC3DS5WgwZvam_d
Summary:



प्रश्न १ – मिथ्या शब्द की रचना कैसे हुई?

उत्तर – जीव और शरीर दोनो को मिला कर एक करना मिथुन कहलाता है, मिथुन शब्द से मिथ्या शब्द बना |

प्रश्न २ – ममत्व करना पूर्णतः गलत नहीं है । क्यों ?

उत्तर – जो अपना हो उससे ममत्व हानिकारक नहीं। अपना ना होने पर भी ममत्व भाव करना समस्यदायी है ।

प्रश्न ३ – अपना क्या है यह जानने के ४ नियम बताए ।

उत्तर – 
१ अपना केवल वह है, जो सदा काल से अपने साथ है ।
२ जो अपना है वह अपने से बाहर नहीं हो सकता ।
३ कोई किसी अन्य का नहीं हो सकता क्योंकि सभी केवल अपने ही हो सकते है ।
४ अन्य पदार्थ कभी उत्तर नही देते की वह आपके है । 

प्रश्न ४ – अन्य पदार्थ किसे माने ? 

उत्तर – जिनके अस्तित्व में आपके स्वामित्व का अभाव हो वे सदा अन्य पदार्थ कहलाते है ।

प्रश्न ५ – जहां अपनत्व होता है वही _____ और ______ होता है ।

उत्तर – कर्तत्व, भोगत्रत्व ।

प्रश्न ६ – स्वजनों में अपनत्व भाव न हुए बिना जीवन कैसे जिया जाए ?

उत्तर – सभी को केवल व्यवहार से अपना मानते हुए ।

प्रश्न ७ – चेतन और अचेतन वस्तु का एक – एक उदाहरण दीजिए ।

उत्तर – कुटुंब – चेतन वस्तु । धन – संपत्ति अचेतन वस्तु ।


Notes Written By Shraddha Jain.

Monday, January 15, 2024

Class Date: 10-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 36 & 37 
Paragraph #: 2 (pg. 36)  & 1 (pg. 37)
YouTube link: 
Summary:
Class Date: 5-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#:
Paragraph #:
YouTube link: https://www.youtube.com/live/YeD0cLkn4cc?si=cnEzFtMdnWLlB3IM
Summary:

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए -


1.मतिज्ञान —------ ज्ञान हैं।

उ.पराधीन

2. मतिज्ञान के द्वारा —---- पदार्थों को जाना जाता है

उ.रूपी

3. मतिज्ञान के द्वारा मात्र —----- काल को जाना जाता है

उ.वर्तमान

4. मति ज्ञान के द्वारा मात्र —--- भावो को जाना जाता है।

उ.स्थूल

5. मति ज्ञान के माध्यम से —---- से जाना जाता है।

उ.क्रम क्रम

एक शब्द में उत्तर दीजिए-


1. मन द्वारा कैसा जाना जाता है?

उ. अस्पष्ट

2. मन कौन से दोनों पदार्थों को जानता है?

उ. रूपी अरुपी

3. काल द्रव्य की पुद्गल पर्याय क्या है?

उ. घंटा घड़ी

4. मन की गति कैसी होती है?

उ. अचिन्त्य

5. इंद्रियों के द्वारा जानने का क्षेत्र कितना है?

उ.9 योजन

सही गलत में उत्तर दीजिए

1. मन सारे द्रव्य क्षेत्र कल को जानता है?

उ.सही

2. मन पर भावों को स्पष्ट जानता है?

उ. गलत

3. मन मात्र इंद्रियों द्वारा ज्ञान या अनुमान किया जा सकता है उसे ही जान सकता है?

उ. सही

4. कीड़े मकोड़े 3 इन्द्रिय होते हैं?

उ.सही

5. पृथ्वी जल ध्वनि वायु वनस्पति की एक कोई सी भी इंद्री ही होती है?

उ.गलत

Notes Written By Neha Gangwal.


Class Date: 9-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 35 & 36
Paragraph #: 4 , 5 , 6   
YouTube link:  https://www.youtube.com/live/TIjwKQV0Q14?si=G7jbiyO8-4qRH-aq
Summary:


रिक्त स्थान


1. दर्शन ......प्रकार के होते है

उत्तर- चार

2. मतिज्ञान से पहले पदार्थों का सामान्य प्रतिभास होना .....गुण है।

उत्तर - दर्शन

3. चक्षु इन्द्रिय द्वारा हुए मतिज्ञान के पहले जो दर्शन (प्रतिभास) हो उसे.... दर्शन कहते है।
 
उत्तर- चक्षु दर्शन

4. स्पर्शन रसना घ्राण कर्ण और मन के संबंध हुए, मतिज्ञान के पहले जो दर्शन हो उसे .......दर्शन कहते हैं।

उत्तर- अचक्षु दर्शन

5. ज्ञान और दर्शन के परिणमन को ..... कहते है।

उत्तर - उपयोग

6. ज्ञान और दर्शन की शक्ति को .....कहते है।

उत्तर - लब्धि

7. ज्ञान के माध्यम से कार्य करने को......कहते है

उत्तर - ज्ञानोपयोग

8. दर्शन के माध्यम से कार्य करने को ....... कहते है।

उत्तर - दर्शनोपयोग

सही / गलत -


1. दर्शनगुण, पदार्थों का सत्तामात्र अवलोकन करता है

Ans-  (√)

2. चार इन्द्रिय और पंच इन्द्रिय जीवो के चक्षु दर्शन होता है 

Ans- (√)

3. केवल दर्शन मोक्षस्वरूप है और केवली के होता है 

Ans- (√)

4. केवल दर्शन स्वतन्त्र नहीं है 

Ans- (x)

5. अवधिज्ञान होने के पूर्व अवधि दर्शन होता है 

Ans- (√)
 
6.ज्ञान और दर्शन की शक्ति क्षयोपशम पर निर्भर नहीं करती है 

Ans- (x)

7. एक जीव को एक समय में एक प्रकार का उपयोग होता है 

Ans-  (√)

प्रश्न/उत्तर


1. दर्शन का अर्थ क्या है?

उत्तर - सामान्य प्रतिभासना

2. उपयोग कितने प्रकार का होता हो?

 उत्तर-उपयोग दो प्रकार का होता है।
         1. ज्ञानोपयोग
         2. दशनोपयोग

3. दर्शन कितने प्रकार का होता है ? 
 उत्तर - दर्शन चार प्रकार का होता है।
         1 चक्षु दर्शन
         २. अचक्षु दर्शन
         3. अवधि दर्शन
         4. केवल दर्शन


Notes Written By Kritika Jain.

Class Date: 8-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 35
Paragraph #: 1 & 2 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/5C2E6ZD03qw?si=hNOvOXL3TGICluAI
Summary:

 अवधिज्ञान के संबंध में इनमें से कौन सा वाक्य सही है 


a) अवधिज्ञान रूपी को जानता है✅ / अरुपी को जानता है।

b) स्पष्ट जानता है। ✅/ अस्पष्ट जानता है।

c) इन्द्रियों और मन से जानता है/ आत्मप्रदेशों से जानता है।✅

d) क्षेत्र,‌ काल की मर्यादा के साथ जानता है ✅/ अमर्यादित ज्ञान है।

e) क्रमिक ज्ञान है ✅/ युगपत् ज्ञान है।

अवधिज्ञान ज्ञान के स्वामी कौन हैं


a) देव, नारकी :- सभी ✅ / किसी-किसी को/ पाया ही नहीं जाता

b) संज्ञी तिर्यंच, मनुष्य:- सभी / किसी-किसी को ✅ । पाया ही नहीं जाता

c) एकेन्द्रिय से असंज्ञी पंचेन्द्रिय तिर्यंच :- सभी / किसी-किसी को / पाया ही नहीं जाता✅

True/false


a) निमित्तज्ञान और अवधिज्ञान एक प्रकार के ही ज्ञान है।

Ans-(f)

b) अवधिज्ञान अपनी मर्यादा के साथ पुदगल द्रव्य को उसके असंख्यात गुण सहित जानता है।

Ans- (t)

c) अवधिज्ञान सीधे आत्म प्रदेशों से जानता है अतः पराधीन नहीं हैं।

Ans-(f)

d) स्वस्ति, कलश, मीन, सूर्य, चंद्र आदि शरीरादिक चिन्हों के माध्यम से अवधिज्ञान होता है अतः पराधीन है।

Ans-  (t)

e) सर्वावधि ज्ञान एक परमाणु को भी जान सकता है।

Ans-  (t)

 short answer type Question:-


a) अवधिज्ञान का विषय कौन से रुपी पदार्थ हैं'?

Ans. पुद्‌‌गल द्रव्य, संसारी जीव

b) अवधि ज्ञान की क्या range है?.

Ans. एक परमाणु से लेकर महास्कंध तक के परमाणु को जानना अधिज्ञान की range है।

c) अवधिज्ञान का कौन सा प्रकार चारों गतियों के जीवों को हो सकता है।

Ans. देशावधि ज्ञान

d) मोक्षमार्ग में कौन से अवधि ज्ञान हो सकते हैं'?

Ans. परमावधि और सर्वावधि

e) मनःपर्यय ज्ञान के स्वामी कौन से जीव हैं?

Ans. मोक्षमार्गी आत्मानुभवी महामुनिराज ही मनःपर्यय ज्ञानी हो सकते हैं।

f) क्या संसार अवस्था में केवलज्ञान का सद्‌भाव पाया जाता है?

Ans. शक्ति की अपेक्षा हाँ, लेकिन व्यक्ति की अपेक्षा नहीं क्योंकि केवलज्ञान मोक्षरूप है।

Notes Written By Nidhi Jain.

Tuesday, January 9, 2024

Class Date: 26-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 31&32
Paragraph #: 1,2,3,4
YouTube link: https://www.youtube.com/live/qRpo-guXdKo?si=c47QoSI0r2PtJF4D
Summary:

 FILL IN THE BLANKS 


1) निगोदिया जीव के संदर्भ में: 
_____ शरीर और उसमें रहने वाले जीव _____।

Ans - असंख्यात , अनंत

2) निगोदिया जीव की _____ इन्द्रिय होती है।

Ans - 1 (स्पर्शन)

3) _____निगोदिया जीव सर्व‌त्र ठसा - ठस भरे हैं।

Ans - नित्य (सूक्ष्म)

4) _____काल से जीव नित्य निगोद में पाया जाता है।

Ans - अनादिकाल 

 TRUE/FALSE 


1) निगोदिया जीव को सुख दुख का अनुभव नहीं होता है।
 
2) 6 महीने 8 समय में 608 जीव इतर निगोद से निकलते हैं।

3) सिद्ध शिला में निगोदिया जीव नही पाए जाते है।

4) कोई जीव नित्य निगोद से निकलकर सीधा मनुष्य पर्याय को धारण कर सकता है।
✔️

ANSWER IN ONE WORD


1) निगोदिया जीव कौन सी गति के जीव है❔

Ans - तिर्यंच गति

2) जीव अनादि काल से कहा पाया जाता है❔

Ans - नित्य निगोद में

3) नित्य निगोद से जीव निकालकर किन-किन पर्यायों को धारण करता है❔

Ans - 1,2,3,4,5 इंद्रियां (साधारण वनस्पति को छोड़कर)

4) एक इन्द्रिय में से कौन से प्रकार में निगोदिया जीव पाए जाते हैं❔

Ans - वनस्पतिकाय में

VERY SHORT ANSWER 


1) निगोद किसे कहते हैं❔

Ans - एक शरीर में अनंते जीव एकमेक होकर रहते हैं उसे निगोद कहते हैं।

2) निगोद कितने प्रकार के होते हैं❔

Ans - दो प्रकार के होते है:-
नित्य निगोद
इतर निगोद ।

3) जीव को किसने पैदा किया है❔

Ans - जीव को कोई पैदा नहीं करता और वह पैदा भी नहीं होता है और उत्पन्न नहीं होता तो उसका नाश भी नहीं होता है।

4) इतर निगोद किसे कहते हैं❔

Ans - जो जीव नित्य निगोद से निकल कर और अन्य पर्यायों में (एक दो तीन चार पांच ) इन्द्रियो को धारण करते हैं, चारो गतियों में परिभ्रमण करते है और यदि उनकी मुक्ति नही होती तो पुनः निगोद को प्राप्त होते हैं और उस निगोद को कहते हैं इतर निगोद।

Notes Written By Khushi Jain.

Friday, January 5, 2024

Class Date: 28-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 32
Paragraph #: 1, 2, 3 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/wmi7MPQvgcw?si=RQJhvWxT-cA0M-AU
Summary:

रिक्त स्थान भरे   

1. स्थावर पर्याय (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, प्रत्येक वनस्पति) मै रहने का _____ उत्कृष्ट काल होता है। 

उ. असंख्यात कल्पकाल 

2. १ कल्पकाल का समय ____ सागर का होता है। 

उ. २० कोड़ा कोड़ी 

3. कोड़ा कोड़ी मतलब ______X________ | 

उ. करोड़, करोड़    

4. त्रस पर्याय मै रहने का उत्कृष्ट काल _____ होता है। 

उ. साधिक २००० सागर 

5. इतर निगोद मै रहने का उत्कृष्ट काल _____ होता है।

 उ. ढाई पुद्गल परवर्तन 

6. नित्य निगोद मै रहने का उत्कृष्ट काल _____ होता है।

 उ. अनादि अनंतकाल 

7. एक इन्द्रिय पर्याय मै रहने का उत्कृष्ट काल _____ होता है।

उ. असंख्यात पुद्गल परावर्तन 

8. बड़े ना राशि_____, घटे न जीव______, जैसी की तैसी रहे, यह _______विनोद | 

उ. अनंतता,निगोद, जिनवचन 
9. एक इन्द्रिय पर्याय की अपेक्षा अन्य पर्याय प्राप्त करना _____ के सामान है | 

उ. काक-तालिय-न्यायवत  

उत्तर लिखिए 


1. एक इन्द्रिय पर्याय मै रहने का उत्कृष्ट काल असंख्यात पुद्गल परावर्तन कैसे होता है? 

उ. कोई इतर निगोदिया जीव ढाई पुद्गल परावर्तन का उत्कृष्ट काल बिताकर, फिर पृथ्वीकायिक आदि स्थावर पर्याय मै उत्पन्न हो, वह कुछ काल बिताकर वापस इतर निगोद पर्याय मै आये, वहां फिर ढाई पुद्गल परवर्तन का उत्कृष्ट काल बिताकर दोबारा किसी स्थावर पर्याय को प्राप्त हो, ऐसा असंख्यात बार परिभ्रमण करते हुए एक इन्द्रिय पर्याय मै उत्कृष्ट काल असंख्यात पुद्गल परावर्तन बिताया जा सकता है | 

2. वह ६०८ कोनसे जीव होते है, जो नित्य निगोद से निकलते है? 

उ. जीव के भाव और भाग्य दोनों ही कारण बनते है | 

3. जब एक समय मै ६०८ जीव मोक्ष जाते है तोह शिखरजी की टोंक से इतने कोड़ा-कोड़ी मुनि मोक्ष कैसे गए?

उ. वह एक समय की संख्या नहीं है, परन्तु पुरे चतुर्थ काल के अलग-अलग समयो मै मुक्त हुए जीवो का जोड़ है |  

4. १७/३ कितना होता है? 

उ. 5.666666666666666666666666666666666666666666666-अनंत बार ६ |

5. त्रस पर्याय मै रहने का जघन्य काल क्या है? 

उ. एक अन्तर्मुहूर्त काल, मतलब ४८ मिनट से कम | 

6. काक-तालिय-न्यायवत का क्या मतलब है? 

उ. कोई व्यक्ति ताली बजाए, तोह उस ताली की तरंग से कोई आम पेड़ से गिरे और उसी समय कोई कौआ वहां से निकले और वह आम उसकी चौच मै आ जाए | इसी तरह ही मुझे यह वर्तमान जीवन प्राप्त हुआ है | 

7. यह सब काल परिभ्रमण जानने से मुझे क्या सीख मिली?
 
उ. मै अनन्तो जीवो मै से वह जीव हूँ, जिसे यह दुर्लभ त्रस पर्याय, मनुष्य गति, उत्तम कुल, सत-संगती प्राप्त हुई है, मुझे संसार के सभी सुख मिले है, जिन्हे मै दुःख कहता हूँ, वास्तव मै वे निगोदिया आदि जीवो की अपेक्षा पहाड़ के सामने राइ बराबर भी नहीं है, अगर मुझे कोई दुःख है तोह वह इस संसार मै परिभ्रमण का दुःख है, जन्म-जरा-मृत्यु का ही एक मात्र मुझे दुःख है | 

सही/गलत लिखिए 


1. ऐसे भी अनंते जीव है जो आज तक निगोद के अलावा किसी अन्य अवस्था को प्राप्त नहीं हुए है | 

Ans- सही 

2. हर ६ महीने ८ समय मै निगोद से ६०८ जीव अन्य पर्याय को प्राप्त होते है | 

Ans- सही 

3. हर ६ महीने ८ समय मै संसार से ६०८ जीव मुक्त होते है | 

Ans- सही 

4. ज्योंकि हर ६ महीने मै जीव मुक्त हो रहे है, तोह संसार जीव राशि अनंत काल बाद ख़तम हो जाएगी |

Ans-  गलत, १ और २ के बीच मै अनंत संख्या 

5. ज्योंकि हर ६ महीने मै निगोद से ६०८ जीव निकलते है, तोह अनंत काल बाद निगोद राशि ख़तम हो जाएगी | 

Ans- गलत, १ और २ के बीच मै अनंत संख्या 

6. तीन काल मै भी एक निगोद शरीर के भी जीव निगोद पर्याय से बहार नहीं निकलते है |

Ans- सही 
7. क्या कोई जीव निगोद से निकलकर १ सेकंड के लिए मनुष्य पर्याय को प्राप्त कर वापस निगोद मै जा सकता है?

Ans-  हा  

8. मुहूर्त मतलब ४८ मिनट | 

Ans- सही 

9. अन्तर्मुहूर्त मतलब ४८ मिनट से ज्यादा समय | 

Ans- गलत, ४८ मिनट से कम को अन्तर्मुहूर्त कहते है | 

10. जैसे सागर मै एक बूँद होती है वैसे ही एक इन्द्रिय पर्याय से त्रस पर्याय का धारण होना होता है |

Ans-  सही     

Notes Written By Ayushi Jain.


Class Date: 4-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 34
Paragraph #: 2 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/W-6iop5M8I4?si=yaXeBxN8g5CuqxZ-
Summary:


 सही ग़लत बताओ


1. ज्ञान वरण कर्म के पं|च प्रकार हैं|

सत्य

2. मन ज्ञान इन्द्रिय ज्ञान से विशिष्ट ज्ञान है।

सत्य

3. इंद्रियों से 6;द्रव्यों का ज्ञान होता है|

असत्य

4. मति श्रुत ज्ञान सभी संसारियों को होता है|

सत्य

 एक शब्द में उत्तर दिजिये 


1.इंद्रिय ज्ञान कौन सा ज्ञान होता है?

उत्तर- पराधीन ज्ञान

2. इंद्रियों से कौन सा द्रव्य संबंध ज्ञान होता है?

उत्तर - पुद्गल द्रव्य संबंधि

3. क्या इंद्रियों द्वारा सूक्ष्म ज्ञान होता है?

उत्तर- नहीं 

4. मन के द्वार त्रिकाल संबंधित ज्ञान कितना होता है?

उत्तर - किंचित मात्र 

 सही विकल्प चुने


1. कौन सा ज्ञान पराधीन ज्ञान नहीं है?

केवलज्ञान
 मन:पर्यय
अवधी ज्ञान

उत्तर - केवलज्ञान 

2. ज्ञान|वरण के कितने प्रकार होते हैं?

तीन 
पांच 
आठ 

उत्तर - पाँच 

3. इंद्रियों के अधीन कैसा ज्ञान होता है?

सर्वज्ञ 
सूक्ष्म 
आस्पष्ट

उत्तर -अस्पष्ट

 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए


1. इंद्रिय जनित ज्ञान का एक मूल सिद्धांत क्या है?

उत्तर - इंद्रिय जनित ज्ञान का एक मूल सिद्धांत है कि हम एक समय में एक ही इंद्रियों के द्वार| ज्ञान कर सकते हैं सभी इंद्रियों से ज्ञान एक साथ नहीं किया जा सकता है|

2. मति-श्रुत ज्ञान किस प्रकार का ज्ञान है?

उत्तर - मति श्रुत ज्ञान इन्द्रिय जनित ज्ञान है, इस ज्ञान को करने के लिए इन्द्रियों का होना आवश्यक है अत: मति श्रुत ज्ञान पराधीन, परोक्ष, और अस्पष्ट ज्ञान है|

3. क्या मति श्रुत ज्ञान एक साथ होता है?

उत्तर - नहीं, मति श्रुत ज्ञान एक साथ नहीं होता है|
किसी वस्तु को जानना मति ज्ञान है और उस वस्तु के बारे में विशिष्ट जनना श्रुत ज्ञान है|

Notes Written By Samta Jain.

Class Date: 2-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 
Paragraph #:
YouTube link: https://www.youtube.com/live/hKUzRXtBB_c?si=5YEWFkOV4Z1rpNgB
Summary:

एक शब्द में उत्तर दीजिए


1. अटवी का क्या अर्थ है और किसे कहा गया है?

- घना जंगल संसार को

2. संसार में किस रूपी अंधेरा है?

-मिथ्यात्व

3. ग्रंथ में सूर्य की उपाधि किसे दी है?

- तीर्थंकर भगवान को

4. दिव्या ध्वनि कहां से खिरती है?

- भगवान के श्री मुख से

5. अंग प्रकीर्णक का उद्योत किसने किया?

- गंधराचार्य ने

रिक्त स्थान के पूर्ति करो


1. —---- से —----- की परंपरा प्रवृत्ति है ?

-ग्रंथ ,ग्रंथों
2. —---- आट्वी में नाना प्रकार के जीव नाना प्रकार के दुखों से पीड़ित है।

-संसार

3. —----- रूप करने से मोक्ष का मार्ग प्रकाशित हुआ।

-दिव्यध्वनि

4. —------- के उदय से भगवान के शरीर के पुद्गल दिव्यध्वनि रूप परिणामित होते हैं।

-अघाती कर्मों

5. —------ के कारण तड़प तड़प कर जीव संसार आटवीं मैं दुख सहते हैं।

-मिथ्या अंधकार

सही गलत में जवाब दीजिए


1. केवली भगवान की इच्छा से मोक्ष मार्ग प्रकाशित होता है?

- गलत

2. भगवान के सर्वांग से दिव्या ध्वनि खिरति है?

-गलत

3. केवली भगवान के शरीर रूप पुद्गल दिव्याधनी रूप परिणम होते हैं?

-सही

4. मिथ्या रूपी अंधकार में संसार आटवीं से पार नहीं हुआ जा सकता?

-गलत

5. दिव्यध्वनि से आचार्य आदि ने ग्रंथो की परंपरा चलाई है?

-सही

Notes Written By Neha Gangwal.


Monday, January 1, 2024

Class Date: 27-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#:
Paragraph #:
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Summary:

सही विकल्प चुने



1. घाति कर्म की ध्रुव बंधी प्रकृतियाँ है

(A) 30 (B) 8 (C) 31 (D) 38

Ans- (D) 38

2. धातिया कर्म की अध्रुव बंध प्रकृतियाँ होती है।

(A) 5 (B) 2 (C) 3 (D) 7

Ans (C) 3

(3) 70कोड़ा कोड़ी स्थिति वाले कर्म की अबाधा होती है

(A) 70वर्ष ( B ) 7वर्ष (C) 700 वर्ष (D) 7000 वर्ष

Ans (D) 7000 वर्ष

(4) मोह के उदय से मिथ्यात्व क्रोधादिक भाव होते हैं, उन सबका नाम है।

(A) प्रमाद
(B) अविर्शत
(C) योग
(D) कषाय

Ans (D) कषाय

(5) जीव के पूजा, प्रक्षाल, धर्मादि क्रियाके समय बंध होता है 
(A) केवल पाप (B) पुण्य
(C) पाप पुण्य दोनो (D) निर्जरा

Ans (C) पाप पुण्य दोनो

 रिक्त स्थान भरे 


(1)योग के द्वारा________ का आगमन होता है। 

ans-कर्मों 

(2) मिथ्यात्व के रहने पर घातिया के 47 में से_________ कर्म हर समय बंधते हैं। 

ans- 41 

(3)योग को ________कहा गया है 

ans- आश्रव 

(4) 13 वे गुण स्थान में अरहन्त भगवान के__________ बंध होता है __________बंध नहीं होता ।

Ans- १प्रदेश २स्थिति अनुभाग 

(5)मोह _______और _______दो प्रकार का है।

Ans- १ दर्शन मोह २ चरित्र मोह 

प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दें 


[1]अबाधा किसे कहते हैं ?

उत्तर-कर्म बंध होने के पश्चात जितने समय तक वह कर्म उदय या उदीरणा रूप ना प्रवर्ते उसे अबाधा कहते हैं।

[2]जिन्हें कर्म बंध नहीं करना है वे क्या नहीं करें ?

उत्तर-जिन्हें कर्म बंध नहीं करना बे कषाय नहीं करें ।

[3]मिथ्यत्व से कितनी कर्म प्रकृतियां का बंध होता है ?

उत्तर--मिथ्यात्व से 16 कर्म प्रकृतियों का बंध होता है ।

[4]क्या मिथ्यात्व बंध में अकिंचितकर है क्यों है क्यों नहीं है ?

उत्तर-- नहीं मिथ्यात्व बंध में अकिंचितकर नहीं है ।मिथ्यात्व नो कर्म बंध का मूल है तत्वार्थ सूत्र में मिथ्यात्व अविरति प्रमाद कषाय को बंध का मूल कारण कहा है। कषाय से बंध में मिथ्यत्व से लेकर कषाय तक सभी कर्म बंध का कारण है।


Notes Written By Shraddha Jain.

Class Date: 29-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 32
Paragraph #: 4 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/Cv5zqYD4Oek?si=1lPXQoMr-X_-9K4v
Summary:

Fill in the blank 

①. कर्म के उदय से होने वाली जीव की अवस्था के द्वारा _______की सिद्धि होती है।

Ans- (कर्म बंधन)

② जीव का स्वभाव ________है।

Ans- (चैतन्य)

③ चैतन्य सामान्य के _____ ____दो भेद है। 

Ans- (ज्ञान, दर्शन) 

4)जीव सर्व पदार्थो के स्वरूप को______करने वाला है।

Ans- (प्रकाशित)

(5) वस्तु को विशेष रूप से जानना______है ।

Ans- (ज्ञान)

(6)प्रत्येक वस्तु मे ______नामक गुण होता है जिसके द्वारा वो जाना जा सकता ।

Ans- (प्रमेयत्व)     
                            

  शब्द अर्थ बताओ- 

1 )त्रिकाल वर्ती = भूत वर्तमान, अविष्य ३ माल संबंधी

2)सर्व पदार्थ =6 द्रव्य 

3)सर्व गुण= विशेषताए 

4) सर्व पर्याय =अवस्थाये

5) प्रत्यक्ष= स्पष्ट निर्मल,विशद

6) युगपत =एक साथ

7)किंचित =कुछ,थोडा

8)कथन्चित =किसी अपेक्षा से

9)कदाचित =कभी       
                             

सही गलत --- 

① ज्ञान किसी भी पदार्थ को जानने में में न छोड़े ऐसी सामर्थ्य ज्ञान स्वभाव की है।

Ans- (सही)

2 )चैतन्य की पूर्ण ज्ञान की शक्ति हर जीव को प्रगट रहती है।

Ans- ( गलत ) 

(३) जीव मे चैतन्य की अभिव्यक्ति तो है पर पूर्णता नही है ।

Ans- ( सही)

(4) सभी संसारी जीवों को मति , श्रुत और अवधि ज्ञान पाया ही जाता है।

Asn- (गलत)
 
⑤ अचक्षु दर्शन सब संसारी जीवों को पाया जाता ।

Ans- (सही)

(6) ज्ञानावरण दर्शनावरण कर्म के कारण जीव की पूर्ण ज्ञान की शक्ति व्यक्त नही हो पा रही है।

Ans- (सही)

(7)वस्तु के सामान्य प्रतिभास को सम्यक दर्शन कहते है ।

Ans- (गलत)

प्रश्न उत्तर--

①- जीव के ज्ञान स्वभाव की शक्ति कितनी है ?

 उत्तर- जीव ज्ञान स्वभाव द्वारा त्रिकालवर्ती , सर्व गुण पर्याय सहित, सर्व पदार्थो को प्रत्यक्ष ,युगपत, विना किसी भी , सहायता के देखे जाने ऐसी शक्ति आत्मा मे सदाकाल है। 

2 प्रश्न - जीव मे पूर्ण ज्ञान शक्ति का स्वभाव होने पर भी प्रगट क्यो नही है?

उत्तर:- एक तो स्वभाव (शक्ति होती है)
उसकी अभिव्यक्ति (प्रगटता)
स्वभाव को प्रगट करने का उपाय करने पर ही शक्ति की अभिव्यक्ति होती है। 

 प्रश्न ③ जीव में ज्ञान की शक्ति है, इसका निर्णय हम कैसे कर सकते है?

 उत्तर-हम पदार्थो को जान सकते है,इसका मतलब हममे ज्ञान है। भिन्न व्यक्तियों मे ज्ञान की शक्ति भिन्न-भिन्न होती है,तो ऐसा भी कोई जीव होना चाहिए जो पूर्ण जान सके

Notes Written By Vandana Jain.








                               
Class Date: 30-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 33
Paragraph #: 1 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/B7VOQ-BeeSg?si=ILXuDf-ipDhl4Jfu
Summary:

       *रिक्त स्थान भरो* 


 *1* जो बाहरी रूप से दिखाई देती हैं उनको _______ कहते हैं।

Ans-( *द्रव्य इंद्रिय)* 

 *2* जीव में ज्ञान की शक्ति तो बहुत हैं लेकिन ज्ञानावरणी के उदय से __________ हो गई हैं। 

Ans-( *कमजोर)* 

 *3* किसी जीव को मानसिक रोग होने का कारण _______ के परमाणुओं का विकृत हो जाना होता हैं।

Ans- ( *द्रव्य मन)* 

      ✅ और❌ बताइए


 *1* ज्ञानावरण और दर्शनावरण का संबंध चैतन्य से हैं। 

Asn- ✅

 *2* इन्द्रियां संसारी जीव को ज्ञान में सहायक हैं परंतु स्वयं जीव नही हैं।

Ans- ✅

 *3* इंद्रिय ज्ञान में इंद्रियों की पराधीनता बिल्कुल भी नही हैं।

Ans- ❌

 *4* मंद ज्ञान की स्थिति में भी जीव द्रव्य इंद्रिय और मन की सहायता के बिना जान सकता है।

Ans- ❌


    *बहु वैकल्पिक प्रश्न*


  *1* ज्ञान की मन्दता के समय जीव का जानना होता हैं -

   अ) स्वयं के ज्ञान से
   ब) द्रव्य इंद्रिय और मन के संबंध से
   स) दोनो से
   द) दोनो से ही नहीं

         *उत्तर* *(स)*

 *2* यदि द्रव्य इंद्रिय और मन के परमाणु अन्यथा परिणमित हो तो जीव:

 अ) थोड़ा जानता है,
 ब) कुछ का कुछ जानता हैं,
 स) अ और ब दोनो
  द) सब कुछ जानता हैं।
    
  *उत्तर* *( स* )

     *प्रश्न उत्तर* 


 *1* संसारी जीव की प्रथम समस्या/पराधीनता क्या हैं?

 *उत्तर* - पूर्ण ज्ञान/ दर्शन का अभाव।

 *2* द्रव्य इंद्रिय, मन और मतिज्ञान
 के बीच में कैसा संबंध हैं?

 *उत्तर* - निमित्त/ नैमित्तिक

 *3* द्रव्य मन का आकार कैसा होता हैं?

 *उत्तर* - 8 पंखुड़ियों के फूले कमल के आकार जैसा।

 *4* वृद्धावस्था में द्रव्य इंद्रियों के शिथिलपने के कारण ज्ञान की कैसी स्थिति बनती हैं?

 *उत्तर* - ज्ञानपने में भी शिथिलता आ जाती हैं।


Notes Written By Pratima Jain.