Sunday, November 19, 2023

Class Date: 15-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 
Paragraph #:
YouTube link: https://www.youtube.com/live/TdewUWjSkJ0?si=BqB6KBcKPom_uklk
Summary:

सही/गलत लिखिए - 

Q.1) कर्म से अनादिसम्बन्ध होने के कारण जीव के प्रदेश कर्म रूप हो जाते है।

Ans- गलत

Q.2 अवधिज्ञान मूर्तिक द्रव्य को जानते हुए संसारी जीव को भी जानता है। 

Ans- सही

Q.3 कर्म बंधन अपेक्षा से अरिहंत भगवान का जीव भी मूर्तिक है।

Ams- सही 

Q.4 मिथ्यादृष्टि जीव सर्वथा मूर्तिक है।

Ans- गलत 

रिक्त स्थान भरे -

Q.1 जीव और पुद्गल का ____ सम्बन्ध है। 

Ans- अनादि 

Q. 2 जैसे जीव रूपादि द्रव्यों को जानता है, उसी प्रकार उनसे ___ है। 

Ans - बंधता

Q.3 ___ पुद्गल और ___ पुद्गल का बंध भी होता है।

Ans - सूक्ष्म ,  स्थूल

Q.4 मैं और मेरा शरीर ____ अवगाही है।  

Ans- एक क्षेत्र 

अर्थ लिखे -

Q.1 सगसब्भावं ण विजहन्ति। 

Ans- कोई भी पदार्थ अपने स्वाभाव को नहीं छोड़ता है।

Q.2 स्निग्धरूक्षत्वाद् बन्धः। 

Ans - स्निग्ध रुक्षता से बंध होता है। 

Q.3 मुत्तो फासदी मुत्तं मुत्तो मुत्तेण बंधमणुहवदि । 

Ans - मूर्त का मूर्त से स्पर्श होता है, मूर्त का मूर्त के साथ बंध होता है। 

Q.4 जीवो मुत्तिविरहिदो गाहदी ते तेहिं उग्गहदि।

Ans - अमूर्तिक जीव मूर्तिक को अवगाहन देता है और उनके द्वारा अवगाहित होता है। 

Q.5 रूपिष्ववधेः

Ans - अवधिज्ञान का विषय सिर्फ रूपी मूर्तिक पदार्थ है।

उत्तर लिखिए -

Q.1 अवधिज्ञान की परिभाषा लिखे। 

Ans - द्रव्य क्षेत्र काल भाव की मर्यादा सहित रूपी पदार्थो को बिना इन्द्रिय की सहायता के सीधे आत्मा से जानता है। 

Q.2 अवधिज्ञान से संसारी जीव को कैसे जाना जाता है?

Ans - संसारी जीव अपनी सांसारिक अवस्था के कारन कथंचित मूर्त होता है। 

Q.3 सूक्ष्मत्व गुण किस गुणस्थान मैं प्रगट होता है?

Ans - सिद्ध दशा

Notes Written By Ayushi Jain.

Class Date: 13-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 23
Paragraph #:
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Summary:

सही अथवा गलत मे उत्तर दीजिए -

Q.1) जीव और कर्मो का अनादि से संबंध है और अनंत तक रहेगा। 

Ans- (गलत)

Q.2)कौन सा कर्म किस समय फल देगा वह सुनिश्चित होता हैं। 
Ans- (सही)

Q.3) जीव और ज्ञान को भिन्न-भित्र किया जा सकता है।

Ans- (गलत)

Q.4) किसी पदार्थ के स्वभाव को उससे भिन्न नही किया जा सकता है। 

Ans- (सही)

Q.5). शरीर, कर्म और आत्मा तीनों एक जगह रहते- रहते भी भिन्न हैं।

Ans- (सही)

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -


Q.1) दो पदार्थ एक दुसरे से तभी ___होते हैं, जब वो एक दूसरे से ___ही हो।

Ans- (भिन्न, भिन्न) 

Q.2) _____के द्वारा जाना जाता है कि दो चीजें एक रूप दिखने पर भी एक दुसरे से पृथक है 

Ans- (तत्व निर्णय)

Q.3)_____में साक्षात दिखता है कि दो चीजें ( कर्म और जीव) एक दूसरे से भिन्न है। 

Ans- (केवलज्ञान ),

Q.4)कर्म ने आत्मा को और ____ने कर्म कभी नही छुआ हैं।

Ans- (आत्मा) 

Q.5) जीव और ___का____से संबंध है।

Ans- (कर्मो, अनादि)

सही विकल्प चुनिये -


Q.1) संबंध अथवा संयोग कहना संभव है

(क) जब पहले भिन्न हो फिर मिले

ख) जब साथ मे हो

ग) जब प्रत्यक्ष हो

घ) जब संसारी हो

उत्तर: -(अ)


Q.2)केवलज्ञानी के ज्ञान मे जीव और कर्म भिन्न दिखते है 

क)परोक्ष रूप से

ख) प्रत्यक्ष रूप से

ग) एक साथ

घ) अश्रित

उत्तर : (ख) प्रत्यक्ष रूप से

Q.3) जीव और कर्मों का संबंध पहले भी भिन्न था ऐसा परोक्ष रूप से कहा जा सकता है

क) अनुमान से

ख) केवलज्ञान से

ग) अनादि से

घ) अंनत से

उत्तर → अनुमान से 

Q.4) जीव, शरीर और कर्मी का बंधन होने पर भी उनमें पाई जाती है

क) प्रारूपता

ख) सामान्यता

ग) भिन्नता

घ) एकता

उत्तर: - भिन्नता

 लघु उत्तरीय प्रश्न -


Q.1) अनादि से मिले जीव कर्मों का संबंध कैसे कहा है?

उत्तर: - जीव और कर्म अनादि से तो मिले थे परन्तु बाद में अलग-अलग भी हुए है और एक दुसरे से भिन्न थे तब ही अलग हुए है अतः एक दुसरे से भिन्न ही जानना! 

Q.2) जीव और कर्म किस प्रकार से भिन्न साबित हुए है?

-उत्तर ⇒ बाद में जब कर्मों और जीव को भिन्न होता पाया और केवलज्ञान मे प्रत्यक्ष रूप से भासित हुआ।

Notes Written By Praneeta Jain.

Monday, November 13, 2023

Class Date: 9-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 22 & 23
Paragraph #: 1 , 2 & 3
YouTube link: https://www.youtube.com/live/ApH5hAx-cQg?si=SQRXdaE0xxdtqIhO
Summary:


Fill in the blanks -


1) जीव का और कर्म का ______ से संबंध है।

Ans - अनादिकाल

2) रागादिक का करण _____ है और द्रव्यकर्म का करण ______ है।

Ans - द्रव्यकर्म ,रागादिक

3) पदार्थ में जो दशा बिना किसी कारण या निमित्त के है उस दशा का नाम _____है। 

Ans - स्वभाव

4) जीव का स्वभाव ____ है।

Ans - ज्ञान

5) कर्मों का आना ______ से होता है।

Ans - रागादिक

 True/False -


1) जीव और कर्म दोनों ही अनादिकाल से हैं परंतु अलग-अलग अवस्था में रहते हैं। 

Ans- (T) ✔️
 
2) कर्म के उदय आए और व्यक्ति रागादिक नही करे ऐसा हो सकता है।

Ans- (F) ✖️

3)स्वभाव का कभी अभाव नहीं होता।

Ans- (T) ✔️

4) ज्ञान और आनंद जीव में से कभी नष्ट नहीं हो सकते।

Ans- (T) ✔️

Short answer type question-


1)अनादि मे भी निमित्त माने तो अनादिपना नहीं रहता क्यों?

Ans - क्योंकि कारण बताने पर कार्य अनादिपना नहीं रहेगा वो सादिपना हो जाता है।

2) जीव का संसार कटना कब प्रारंभ होगा?

Ans - जब जीव का ध्यान ज्ञान की ओर जाएगा तब जीव का संसार कटना प्रारंभ होगा।

3) जीव का स्वभाव राग द्वेष करना क्यों नहीं है?

Ans - 
1️⃣क्योंकि जो स्वभाव होता है वह जीव के पास हमेशा रहता है।
2️⃣स्वभाव से कभी जीव को दुःख नहीं होता। 
3️⃣स्वभाव का कभी अभाव नहीं होता।

4) जीव और पुद्गल भिन्न भिन्न द्रव्य है तो अनादि से उनका संबंध कैसे हो सकता है?

Ans -जिस प्रकार दूध में पानी स्वयं ही मिला रहता है, तिल में तेल स्वयं ही रहता है, उसी प्रकार जीव और कर्म का भी संबंध अनादिकालीन होता है।

5)इतरेतराश्रय दोष क्या कहलाता है?

Ans- द्रव्यकर्म से रागादिक होते है और रागादिक से द्रव्यकर्म बंधते हैं यह एक दूसरे के आश्रित है इसमें कहीं रुकाव नहीं है इसलिए इसे इतरेतराश्रय दोष कहते हैं।

6) अगर आत्मा पहले से शुद्ध था और फिर कर्म अचानक से आत्मा से मिले तो ऐसा मानने से क्या होता?

Ans-इसका मतलब यह है कि जीव पहले सिद्ध था और किसी दिन कर्म आत्मा से मिला तो सिद्ध बन जाने पर भी जीव संसार में आ जाता है अथात् मुक्ति फिर पुन: संसार इसलिए ऐसा मानना उचित नहीं है । कर्म और जीव का संबंध अनादि से है ऐसा ही जानना चाहिए।

Notes Written By Khushi Jain.

Thursday, November 9, 2023

Class Date: 8-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 22
Paragraph #: 1&2
YouTube link: https://www.youtube.com/live/oyD5__zhmiw?si=erAo14DwkaX35Ya2
Summary:

  सही/गलत -


Q.1. कर्म बंधन सहित अवस्था का नाम संसार अवस्था है

Ans- [✓]

Q.2. प्रत्येक संसारी जीव अनादि काल से है 

Ans- [✓]

Q.3. संसार अवस्था में अनंतानंत जीव द्रव्य नही है

Ans- [X]

Q.4. पुद्‌गल के सबसे छोटे द्रव्य को परमाणु कहते हैं

Ans- [✓]

Q.5. कर्म के प्रकार आठ और परमाणु अनंत है 

Ans- [✓]

Q.6. पहले जीव शुद्ध था और कर्म अलग थे, बाद मे दोनो का संयोग हुआ। 

Ans-[X]

Q.7. अनादि कर्म बंधन से निमित्त का कोई प्रयोजन नहीं है 

Ans- [✓]

Q.8. भावो में एकरूपता पाई जाना औपाधिक भाव है

Ans-  [x]

Q.9. मेरु पर्वत अकृत्रिम स्कंध है

Ams- [✓] 

Q.10. अनादि वाले कर्म का पुद्गल परमाणु, जीव से अब तक जुड़ा हुआ है

Ans- [x]

Q.11. अरिहंत भगवान अनादि को अनादि जैसा, और अनंत को अनंत जैसा जानते है 

Ans- [✓]

रिक्त स्थान -


Q.1. कर्म बंधन से युक्त संसारी जीवों के.........भाव होता है।

उत्तर- औपाधिक

Q.2. परमाणु के समूह को .......कहते है।

उत्तर- स्कंध

Q.3. जीव को कर्म बंधन......काल से है।

उत्तर -अनादि

Q.4. जिसमे स्पर्श, रस, गंध, वर्ण पाया जाये उसे .......कहते है

उत्तर -पुद्‌गल

Q.5. वीतरागी भगवान के ...... भाव होता है।

उत्तर - क्षायिक

Q.6. जिसका आदि ना हो उसे ........और जिसका अंत ना हो उसे ......कहते है।

 उत्तर - अनादि, अनंत

बहु वेकल्पिक प्रश्न -


Q.1. कर्म बंध जीव को किस कारण होता है 

 A पाप-पुण्य
 B.राग-द्वेष
 C. मोह और अज्ञान
 D. सभी 

        उत्तर - D


Q.2. जीव और कर्म का संबंध कब से है 

 A. जीव न्यारा है और कर्म न्यारा है
 B. जीव और कर्म का संबंध अनादि से
 C. जीव और कर्म का संयोग बाद मे बना 
     
               उत्तर - B

Q.3. उदाहरण में मेरु पर्वत की तुलना किससे की है

 A. कर्म बंधन
B. जीव
C. जीव और कर्मबंधन 
                 
             उत्तर - B

Notes Written By Kritika Jain.

Class Date: 7-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 21 & 22
Paragraph #: pg no. 21(2&3) , pg no. 22(1)
YouTube link: https://www.youtube.com/live/pFl3_22oaSs?si=bDyA82t_yN1u_bBq
Summary:


रिक्त स्थान भरो -


Q.1. 'कर्म बन्धन से मुक्त होने का _ _ _ _करना है

Ans.साधन

Q.2.प्रतीति का अर्थ_____ होता है।

Ans विश्वास

Q 3. उदाहरण में मनुष्य को प्रथम _______का
निदान बताया है ।

Ans. रोग

Q.4. _______श्रद्धान के बिना कर्म नहीं कटेंगे।

Ans.आत्मा

Q.5 शास्त्र का सुनना जरूरी _____है के लिए। 

Ans. विश्वास 

Q.6 मिश्री का कड़वा पना_____से है

Ans. बाहरी कारण (औपाधिक भाव -)

Q.7.कर्म बन्धन होने से नाना ______भावों में _____ पाया जाता है 

Ans = 1 औपाधिक भाव, परिभ्रमण

Q 8. अंजन चोर ______था

Ans.सप्तव्यसनी

प्रश्न उत्तर -


Q 1. रोगी का कर्तव्य क्या है ???

Ans. वैद्य द्वारा बताए गए उपाय का साधन करना रोगी का कर्तव्य है 

Q.2. जैसे शरीर का स्वभाव स्वथ्य रहना है वैसे आत्मा का स्वभाव क्या है ??

Ans. आत्मा का स्वभाव शुद्ध रहने का, ज्ञाता द्रष्टा रहने का है ।

Q.3.कर्म बंधन से मुक्त होने का उपाय क्या है ??

Ans. प्रथम उपाय -- सिद्ध समान शुद्ध हूँ मैं, आत्म निरंजन हूँ ऐसा स्वीकार करना 
दूसरा उपाय -- चरणानुयोग अनुसार प्रवर्तन करना , दीक्षा लेना।
तीसरा उपाय-- स्वाध्याय , चिंतन मनन , भेद ज्ञान , ध्यान करना।

Q.4. श्री गुरु ने दूसरे अधिकार में क्या बताया है ??

Ans.श्री गुरु ने संसार अवस्था का स्वरूप और कर्म बंधन के कारण को बताया है।

Q.5. औपाधिक भाव और स्वभाव भाव की परिभाषा ??

Ans. जीव में या पदार्थ में बाहरी कारणों के संयोग से होने वाली दशा को औपाधिक भाव कहा है ।
स्वभाव भाव-- जो पदार्थ में बिना किसी बाहरी कारण के जो अवस्था बने वह स्वभाव भाव है।

सही√ और गलत× बताइये-


Q.1.,भगवान महावीर पूर्व भव में सिंह की पर्याय में थे।

Ans- √

Q.2 भरत चक्रवर्ती षट्‌कर्मों का पालन कभी-कभी करते थे।

Ans- ×

Q.3.सप्तव्यसन मे लीन जीव उसी भव में मोक्ष जा सकता है । 

Ans- √

 Q.4 भरत चक्रवर्ती के 96000 रानीया और 32000 पुत्र पुत्रियां थे।

Ans- √

Q.5. रोग की प्रतीति करने मात्र से रोग दूर हो जाता है 

Ans- X

Q.6.शास्त्र के उपदेश को यर्थाथ पालन करना कर्म बन्धन से मुक्त होने का साधन है।

Ans-√

Q.7. संसारी अवस्था मे आत्मा अनादि काल से कर्म बंधन सहित है 

Ans- √

Q.8.इस इस ग्रंथ में दूसरे अधिकार में संसार अवस्था का स्वरूप बताया गया है 

Ans- √

Notes Written By Shraddha Jain.

Wednesday, November 8, 2023

Class Date: 6-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 21
Paragraph #: 1
YouTube link: https://www.youtube.com/live/NRi_Rt0JNGc?si=B-8QAIOYm2NeO82O
Summary:

रिक्त स्थान भरो-


 Q.1 _______धर्म ही_______ का सच्चा उपाय हैं।
   
Ans-  ( *रत्नत्रय, मोक्ष प्राप्ति* )


 Q.2 चार गतियों मे भ्रमण का मूल कारण_______ है।  

Ans- (मिथ्याभाव)

 Q.3 प्रत्येक जीव का परम हित________ से छूटने मे ही है।

Ans- ( *कर्म बन्धन)* 

 Q.4 कर्म का बन्धन आत्मा मे _________ के समान ही कहा गया है

Ans-  [ *विजातीय तत्वो ]* 

 Q.5 भली/ हितकारी वस्तु की प्राप्ति का सच्चा उपाय करना ही जीव_____ का है। 

Ans- [ *कर्तव्य ]*

✅और ❌ बताइये -


 Q.1 मोक्षमार्ग प्रकाशक ग्रन्थ के दूसरे अधिकार में संसार अवस्था का स्वरूप बताया गया है। 

Ans- ✅

 Q.2 मिथ्यादर्शन मिथ्याज्ञान, मिथ्याचरित्र संसार से छूटने का उपाय है। 

Ans- ❌
  
 Q.3 मोह, राग, द्वेष के अभाव होने पर ही आत्मा का निज स्वाभाव प्रगट हो सकता है। 

Ans- ✅

Q.4 मात्र सम्यग्दर्शन ही मोक्ष प्राप्ति का उपाय है। 

Ans-  ❌

Q.5 दु:खो का मूल कारण कर्म बंधन का अभाव हैं। 

Ans- ❌

Q.6 दुख का मूल कारण अन्य जीवों द्वारा अपने प्रति किया गया अच्छा बुरा व्यवहार होता हैं 

Ans- ❌

Q.7 मिथ्या भाव के अभाव से सम्यगदर्शन,सम्यज्ञान ,सम्यचारित्र रूप भाव प्रगट होता है।

Ans- ✅

Q.8 हमारा प्रयास सदैव दु:ख का नाश होकर सुख की प्राप्ति हो यही रहता है। 

Ans- ✅
 
 Q.9 जीव का परम हित कर्म बंध के अभाव रूप मोक्ष अवस्था में ही हैं।

Ans- ✅

 Q.10 हम निरंतर संसार के दु:खो को दूर करने का सच्चा उपाय कर रहे हैं। 

Ans-  ❌

 प्रश्न उत्तर -

Q.1 मिथ्या भावो के अभाव से क्या प्रगट होता हैं?

 *उत्तर*- आत्मा का निज स्वाभाव

 Q.2 वह कौनसे भाव है जो हमे संसार से मुक्त नहीं होने देते हैं?

 *उत्तर*- मिथ्या दर्शन, मिथ्याज्ञान मिथ्याचारित्र रूपी भाव।

 Q.3 हमारा परम कर्तव्य क्या है?

 *उत्तर* - परम हितकारी मोक्ष अवस्था की प्राप्ति का प्रयास करना।

 Q.4 पंडित जी ने रोगी और वैद्य की उपमा किनको दी है ?

 *उत्तर* - *रोगी*- संसारी जीव 
 * *वैद्य* - ग्रंथकार/ प्रवचन कर्ता / उपदेशकर्ता

 Q.5  निरंतर दु:ख दूर करने के उपाय करने के बाद भी जीव व्याकुल क्यों हो रहा है?

 *उत्तर*-  सच्चा उपाय करने का अभाव है। दुख के अभाव रूप मोक्ष का उपाय नहीं किया जा रहा हैं।

 Q.6 उपदेश दाता को जीव का दु:ख दूर करने के लिए प्रथम कर्तव्य क्या होना चाहिए?
 *उत्तर* - दुःख दूर होने के सच्चे उपाय का उपदेश देना।

 Q.7 पंडित जी ने वैद्य का उदाहरण देते हुए रोग दूर करने का पहला उपाय क्या कहा है?

 *उत्तर* - सर्वप्रथम रोगी को रोग का कारण बताया जाए कि उसे कौनसा रोग हुआ है और क्यों हुआ हैं।

 Q.8 संसारी जीव हो क्या बताना अत्यन्त कठिन है?

 *उत्तर* - कर्म बन्धन का रोग ।

 Q.9 अनादि से जीव को किसका रोग हुआ है?

 *उत्तर* - कर्म बन्ध का ,(मिथ्याभावो का )।

 बहु वैकल्पिक प्रश्न -

   Q.1 रोगी/ दु:खी जीव को दुःख का कारण पता चलनेके बाद बताया जाता हैं:

Ans-

 *अ* ) रोग / दुःख के कारण से जो लक्षण दिखते हैं।

  *ब* रोग/ दुःख का निश्चय करनाl

    *स* दूर करने के उपाय और उपाय की प्रतीति।

     *द* ये सभी

           *उत्तर* - ( *द* )

 Q.2 यह जीव कर्म बंधन रूपी रोग को ठीक करने की प्रवृत्ति करेगा:

Ans-

 *अ* जब वह कर्म बंधन को स्वीकार करेगा।
  *ब* जब उसको मिथ्या भाव होंगे।
  *स* जब उसे सांसारिक सुख की प्राप्ति होगी।
   *द* जब वह पंडित बनेगा ।

    *उत्तर* - ( *अ* )

Notes Written By Pratima Jain.

Monday, November 6, 2023

Class Date: 4-11-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 20
Paragraph #: 2,3,4,5
YouTube link: https://www.youtube.com/live/z2dJdDdE6R4?si=RHx9q3tBRavVPzNr
Summary:


सही विकल्प चुनिए -

1. धर्म के ध्यान रूपी महान अंग की प्राप्ति करने के लिए (सबसे) पहले जरूरी है - 

a) उपवास b) काय क्लेश c) स्वाध्याय d) संयम 

Ans. - c) स्वाध्याय 

2. आगम कहते है - 

a) आप्त के द्वारा कहा हुआ b) गणधर के द्वारा गूँथा हुआ c) मुनिराजों के द्वारा कहा हुआ d) सभी 

Ans. - d) सभी

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -

1. उत्तम क्षमादि लक्षण, देवपूजादि तथा सामायिक आदि आवश्यक, अहिंसादि व्रत पालन, स्वाध्याय, ध्यानादि तप तथा दीक्षा आदिक सभी ___ के अंग है ।

Ans- (धर्म) 

2. कर्म के-शरीर के संसार रूपी जेल में से निकलने का ना तो कभी सोचे ना उसके लिए कुछ अभ्यास-प्रयास ही करे, उन्हें ______ कहा जाता है !

Ans- ( अभागा) 

सही गलत बताइए -

1. ‘… आगमचेट्ठा तदो जेट्ठा ॥’ इस गाथा में प्रथम आगमज्ञान को ही करने योग्य (उपादेय) कहा है ।

Ans- (सही) 

2. जो सहजता से गुरु मिलने पर जिनवचनों को सुनता है तथा जो संसार से भयभीत है, उन्हें सुभट कहा है । 

Ans- (गलत) 

एक शब्द में उत्तर दीजिए -

1. एक ऐसा रत्न जिसके द्वारा (मन में) चिन्तित सभी वस्तुओं की प्राप्ति होती है - _____

Ans- (चिन्तामणी)

2. इनको स्नातक (भी) कहा जाता है - _____ ।

Ans- (अरिहंत) 

एक वाक्य में उत्तर लिखिए -

1. अभागे के होनहार का ही विचार करके अपने को क्या करने लायक है ? 

Ans- अभागे के होनहार का ही विचार करके अपने को समता रखने लायक है।

2. संसार से निकलने के लिए 4 आवश्यक क्या है ? 

Ans- संसार से निकलने के लिए 4 आवश्यक हैं - तत्त्वज्ञान, तत्त्वविचार/तत्त्वचिन्तन, तत्त्वनिर्णय, तत्त्वानुभव । 


संक्षेप में उत्तर दीजिए -

1. अभाग्य की महिमा कैसे बतलायी गई है ?

Ans-
a) बिना प्रयास किये, अपनेआप ही, चिन्तामणि (जैसा बड़ा दुर्लभ) रत्न देखने का मौका मिल जाने पर भी जो दरिद्री उसको देखें तक नहीं, 
b) जिसका पान करने पर व्यक्ति अमर हो जाए, रोगी शरीर भी सुन्दर हो जाए, ऐसा दुर्लभ जो अमृत, उसको पीलाने पर भी जो कोढ़ी उसको चखे तक नहीं, 
ऐसे बड़े दरिद्री तथा कोढ़ी के उदाहरणों के माध्यम से अभ्याग्य की महिमा बतलाई गई है । 

2. दरिद्री और कोढ़ी का उदाहरण देकर वास्तविक किसे अभागा कहा जा रहा है ?

Ans-
संसाररूपी अटवी से निकलने का कोई रास्ता ही नहीं नज़र आ रहा है, ऐसे संसार से पीड़ित व्यक्ति को, जिनवाणी का योग मिलने पर तथा जिनेन्द्र परमात्मा का संग मिलने पर भी, अगर वो उसका अभ्यास ही न करें, भगवान को न जाने और नहीं उनका स्वरूप माने, उसे ही अभागा कहा गया है ।


Notes Written By Dipali Gandhi.