Thursday, November 9, 2023

Class Date: 7-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 21 & 22
Paragraph #: pg no. 21(2&3) , pg no. 22(1)
YouTube link: https://www.youtube.com/live/pFl3_22oaSs?si=bDyA82t_yN1u_bBq
Summary:


रिक्त स्थान भरो -


Q.1. 'कर्म बन्धन से मुक्त होने का _ _ _ _करना है

Ans.साधन

Q.2.प्रतीति का अर्थ_____ होता है।

Ans विश्वास

Q 3. उदाहरण में मनुष्य को प्रथम _______का
निदान बताया है ।

Ans. रोग

Q.4. _______श्रद्धान के बिना कर्म नहीं कटेंगे।

Ans.आत्मा

Q.5 शास्त्र का सुनना जरूरी _____है के लिए। 

Ans. विश्वास 

Q.6 मिश्री का कड़वा पना_____से है

Ans. बाहरी कारण (औपाधिक भाव -)

Q.7.कर्म बन्धन होने से नाना ______भावों में _____ पाया जाता है 

Ans = 1 औपाधिक भाव, परिभ्रमण

Q 8. अंजन चोर ______था

Ans.सप्तव्यसनी

प्रश्न उत्तर -


Q 1. रोगी का कर्तव्य क्या है ???

Ans. वैद्य द्वारा बताए गए उपाय का साधन करना रोगी का कर्तव्य है 

Q.2. जैसे शरीर का स्वभाव स्वथ्य रहना है वैसे आत्मा का स्वभाव क्या है ??

Ans. आत्मा का स्वभाव शुद्ध रहने का, ज्ञाता द्रष्टा रहने का है ।

Q.3.कर्म बंधन से मुक्त होने का उपाय क्या है ??

Ans. प्रथम उपाय -- सिद्ध समान शुद्ध हूँ मैं, आत्म निरंजन हूँ ऐसा स्वीकार करना 
दूसरा उपाय -- चरणानुयोग अनुसार प्रवर्तन करना , दीक्षा लेना।
तीसरा उपाय-- स्वाध्याय , चिंतन मनन , भेद ज्ञान , ध्यान करना।

Q.4. श्री गुरु ने दूसरे अधिकार में क्या बताया है ??

Ans.श्री गुरु ने संसार अवस्था का स्वरूप और कर्म बंधन के कारण को बताया है।

Q.5. औपाधिक भाव और स्वभाव भाव की परिभाषा ??

Ans. जीव में या पदार्थ में बाहरी कारणों के संयोग से होने वाली दशा को औपाधिक भाव कहा है ।
स्वभाव भाव-- जो पदार्थ में बिना किसी बाहरी कारण के जो अवस्था बने वह स्वभाव भाव है।

सही√ और गलत× बताइये-


Q.1.,भगवान महावीर पूर्व भव में सिंह की पर्याय में थे।

Ans- √

Q.2 भरत चक्रवर्ती षट्‌कर्मों का पालन कभी-कभी करते थे।

Ans- ×

Q.3.सप्तव्यसन मे लीन जीव उसी भव में मोक्ष जा सकता है । 

Ans- √

 Q.4 भरत चक्रवर्ती के 96000 रानीया और 32000 पुत्र पुत्रियां थे।

Ans- √

Q.5. रोग की प्रतीति करने मात्र से रोग दूर हो जाता है 

Ans- X

Q.6.शास्त्र के उपदेश को यर्थाथ पालन करना कर्म बन्धन से मुक्त होने का साधन है।

Ans-√

Q.7. संसारी अवस्था मे आत्मा अनादि काल से कर्म बंधन सहित है 

Ans- √

Q.8.इस इस ग्रंथ में दूसरे अधिकार में संसार अवस्था का स्वरूप बताया गया है 

Ans- √

Notes Written By Shraddha Jain.

Wednesday, November 8, 2023

Class Date: 6-11-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 21
Paragraph #: 1
YouTube link: https://www.youtube.com/live/NRi_Rt0JNGc?si=B-8QAIOYm2NeO82O
Summary:

रिक्त स्थान भरो-


 Q.1 _______धर्म ही_______ का सच्चा उपाय हैं।
   
Ans-  ( *रत्नत्रय, मोक्ष प्राप्ति* )


 Q.2 चार गतियों मे भ्रमण का मूल कारण_______ है।  

Ans- (मिथ्याभाव)

 Q.3 प्रत्येक जीव का परम हित________ से छूटने मे ही है।

Ans- ( *कर्म बन्धन)* 

 Q.4 कर्म का बन्धन आत्मा मे _________ के समान ही कहा गया है

Ans-  [ *विजातीय तत्वो ]* 

 Q.5 भली/ हितकारी वस्तु की प्राप्ति का सच्चा उपाय करना ही जीव_____ का है। 

Ans- [ *कर्तव्य ]*

✅और ❌ बताइये -


 Q.1 मोक्षमार्ग प्रकाशक ग्रन्थ के दूसरे अधिकार में संसार अवस्था का स्वरूप बताया गया है। 

Ans- ✅

 Q.2 मिथ्यादर्शन मिथ्याज्ञान, मिथ्याचरित्र संसार से छूटने का उपाय है। 

Ans- ❌
  
 Q.3 मोह, राग, द्वेष के अभाव होने पर ही आत्मा का निज स्वाभाव प्रगट हो सकता है। 

Ans- ✅

Q.4 मात्र सम्यग्दर्शन ही मोक्ष प्राप्ति का उपाय है। 

Ans-  ❌

Q.5 दु:खो का मूल कारण कर्म बंधन का अभाव हैं। 

Ans- ❌

Q.6 दुख का मूल कारण अन्य जीवों द्वारा अपने प्रति किया गया अच्छा बुरा व्यवहार होता हैं 

Ans- ❌

Q.7 मिथ्या भाव के अभाव से सम्यगदर्शन,सम्यज्ञान ,सम्यचारित्र रूप भाव प्रगट होता है।

Ans- ✅

Q.8 हमारा प्रयास सदैव दु:ख का नाश होकर सुख की प्राप्ति हो यही रहता है। 

Ans- ✅
 
 Q.9 जीव का परम हित कर्म बंध के अभाव रूप मोक्ष अवस्था में ही हैं।

Ans- ✅

 Q.10 हम निरंतर संसार के दु:खो को दूर करने का सच्चा उपाय कर रहे हैं। 

Ans-  ❌

 प्रश्न उत्तर -

Q.1 मिथ्या भावो के अभाव से क्या प्रगट होता हैं?

 *उत्तर*- आत्मा का निज स्वाभाव

 Q.2 वह कौनसे भाव है जो हमे संसार से मुक्त नहीं होने देते हैं?

 *उत्तर*- मिथ्या दर्शन, मिथ्याज्ञान मिथ्याचारित्र रूपी भाव।

 Q.3 हमारा परम कर्तव्य क्या है?

 *उत्तर* - परम हितकारी मोक्ष अवस्था की प्राप्ति का प्रयास करना।

 Q.4 पंडित जी ने रोगी और वैद्य की उपमा किनको दी है ?

 *उत्तर* - *रोगी*- संसारी जीव 
 * *वैद्य* - ग्रंथकार/ प्रवचन कर्ता / उपदेशकर्ता

 Q.5  निरंतर दु:ख दूर करने के उपाय करने के बाद भी जीव व्याकुल क्यों हो रहा है?

 *उत्तर*-  सच्चा उपाय करने का अभाव है। दुख के अभाव रूप मोक्ष का उपाय नहीं किया जा रहा हैं।

 Q.6 उपदेश दाता को जीव का दु:ख दूर करने के लिए प्रथम कर्तव्य क्या होना चाहिए?
 *उत्तर* - दुःख दूर होने के सच्चे उपाय का उपदेश देना।

 Q.7 पंडित जी ने वैद्य का उदाहरण देते हुए रोग दूर करने का पहला उपाय क्या कहा है?

 *उत्तर* - सर्वप्रथम रोगी को रोग का कारण बताया जाए कि उसे कौनसा रोग हुआ है और क्यों हुआ हैं।

 Q.8 संसारी जीव हो क्या बताना अत्यन्त कठिन है?

 *उत्तर* - कर्म बन्धन का रोग ।

 Q.9 अनादि से जीव को किसका रोग हुआ है?

 *उत्तर* - कर्म बन्ध का ,(मिथ्याभावो का )।

 बहु वैकल्पिक प्रश्न -

   Q.1 रोगी/ दु:खी जीव को दुःख का कारण पता चलनेके बाद बताया जाता हैं:

Ans-

 *अ* ) रोग / दुःख के कारण से जो लक्षण दिखते हैं।

  *ब* रोग/ दुःख का निश्चय करनाl

    *स* दूर करने के उपाय और उपाय की प्रतीति।

     *द* ये सभी

           *उत्तर* - ( *द* )

 Q.2 यह जीव कर्म बंधन रूपी रोग को ठीक करने की प्रवृत्ति करेगा:

Ans-

 *अ* जब वह कर्म बंधन को स्वीकार करेगा।
  *ब* जब उसको मिथ्या भाव होंगे।
  *स* जब उसे सांसारिक सुख की प्राप्ति होगी।
   *द* जब वह पंडित बनेगा ।

    *उत्तर* - ( *अ* )

Notes Written By Pratima Jain.

Monday, November 6, 2023

Class Date: 4-11-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 20
Paragraph #: 2,3,4,5
YouTube link: https://www.youtube.com/live/z2dJdDdE6R4?si=RHx9q3tBRavVPzNr
Summary:


सही विकल्प चुनिए -

1. धर्म के ध्यान रूपी महान अंग की प्राप्ति करने के लिए (सबसे) पहले जरूरी है - 

a) उपवास b) काय क्लेश c) स्वाध्याय d) संयम 

Ans. - c) स्वाध्याय 

2. आगम कहते है - 

a) आप्त के द्वारा कहा हुआ b) गणधर के द्वारा गूँथा हुआ c) मुनिराजों के द्वारा कहा हुआ d) सभी 

Ans. - d) सभी

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -

1. उत्तम क्षमादि लक्षण, देवपूजादि तथा सामायिक आदि आवश्यक, अहिंसादि व्रत पालन, स्वाध्याय, ध्यानादि तप तथा दीक्षा आदिक सभी ___ के अंग है ।

Ans- (धर्म) 

2. कर्म के-शरीर के संसार रूपी जेल में से निकलने का ना तो कभी सोचे ना उसके लिए कुछ अभ्यास-प्रयास ही करे, उन्हें ______ कहा जाता है !

Ans- ( अभागा) 

सही गलत बताइए -

1. ‘… आगमचेट्ठा तदो जेट्ठा ॥’ इस गाथा में प्रथम आगमज्ञान को ही करने योग्य (उपादेय) कहा है ।

Ans- (सही) 

2. जो सहजता से गुरु मिलने पर जिनवचनों को सुनता है तथा जो संसार से भयभीत है, उन्हें सुभट कहा है । 

Ans- (गलत) 

एक शब्द में उत्तर दीजिए -

1. एक ऐसा रत्न जिसके द्वारा (मन में) चिन्तित सभी वस्तुओं की प्राप्ति होती है - _____

Ans- (चिन्तामणी)

2. इनको स्नातक (भी) कहा जाता है - _____ ।

Ans- (अरिहंत) 

एक वाक्य में उत्तर लिखिए -

1. अभागे के होनहार का ही विचार करके अपने को क्या करने लायक है ? 

Ans- अभागे के होनहार का ही विचार करके अपने को समता रखने लायक है।

2. संसार से निकलने के लिए 4 आवश्यक क्या है ? 

Ans- संसार से निकलने के लिए 4 आवश्यक हैं - तत्त्वज्ञान, तत्त्वविचार/तत्त्वचिन्तन, तत्त्वनिर्णय, तत्त्वानुभव । 


संक्षेप में उत्तर दीजिए -

1. अभाग्य की महिमा कैसे बतलायी गई है ?

Ans-
a) बिना प्रयास किये, अपनेआप ही, चिन्तामणि (जैसा बड़ा दुर्लभ) रत्न देखने का मौका मिल जाने पर भी जो दरिद्री उसको देखें तक नहीं, 
b) जिसका पान करने पर व्यक्ति अमर हो जाए, रोगी शरीर भी सुन्दर हो जाए, ऐसा दुर्लभ जो अमृत, उसको पीलाने पर भी जो कोढ़ी उसको चखे तक नहीं, 
ऐसे बड़े दरिद्री तथा कोढ़ी के उदाहरणों के माध्यम से अभ्याग्य की महिमा बतलाई गई है । 

2. दरिद्री और कोढ़ी का उदाहरण देकर वास्तविक किसे अभागा कहा जा रहा है ?

Ans-
संसाररूपी अटवी से निकलने का कोई रास्ता ही नहीं नज़र आ रहा है, ऐसे संसार से पीड़ित व्यक्ति को, जिनवाणी का योग मिलने पर तथा जिनेन्द्र परमात्मा का संग मिलने पर भी, अगर वो उसका अभ्यास ही न करें, भगवान को न जाने और नहीं उनका स्वरूप माने, उसे ही अभागा कहा गया है ।


Notes Written By Dipali Gandhi.

Saturday, November 4, 2023

Class Date: 3-11-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 19 & 20
Paragraph #: pg no. 19(3,4,5) pg no. 20(1)
YouTube link: https://www.youtube.com/live/LWXNfMHfq24?si=jykTA0tR66SPeVMw
Summary:

Fill in the blanks -


Q.1 संसार से निकलने का उपाय _______ है ?

Ans- मोक्ष मार्ग।
 
Q.2 ______ जीवो के मन नहीं होते हैं?

Ans- 1 से 4 इंद्रिय व कुछ पंचेेंद्रीय के।

Q.3 मिथ्यत्व मोह राग द्वेष से सहित जीवो के समझ नहीं आता?

Ans मोक्षमार्ग।

सही गलत बताइए-


Q.4 कु शास्त्र सच्चा मोक्ष मार्ग दिखाने वाले हैं?

Ans नहीं।

Q5 प्राचीन समय में मोक्ष मार्ग प्रकाशक ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गए थे?

Ans नहीं।

Q6 18 लघु भाषा व 700 महाभाषा रूप द्वादशांग रूप जिनवाणी है?

Ans नहीं।

Q7 कषाय, यश प्राप्ति, लोभ रखने व अपनी परंपरा के लिए ग्रंथो को पढ़ना व पढ़ाना चाहिए?

Ans - नही।

Q.8 मुलाचार, समयसार, नियमसार, भगवती आराधना प्राकृत भाषा में लिखे गए ग्रंथ है?

Ans हाँ।

Q.9 क्या दिव्यध्वनि में सभी जीवो को अपनी-अपनी भाषा में समझआता है?

Ans हाँ।

Q.10 प्रकीर्णक 18 होते हैं?

Ans नहीं।

Q.11 जयपुर में ढूंढारी भाषा चलती थी?

Ans हाँ।

Q.12 बड़े ग्रंथो का प्रकाशन बहुत ज्ञानादि न होने के कारण हुआ है?

Ans नहीं।

Q.13 भाषा वचनिका में सुगम भाषा में ट्रांसलेट किया जाता है?

Ans हाँ।

Notes Written By Reena Doshi .

Thursday, November 2, 2023

Class Date: 12-10-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 9
Paragraph #: 1,2 &3
YouTube link: https://www.youtube.com/live/WuH_zo2JckU?si=SMEwi9gtPNcThDr9
Summary:

 बहुवैकल्पिक प्रश्न -


1. इनमें से कौन देवों के प्रकार है ?

(a) व्यंतर देव

(b) ज्योतिषि देव

(c) वैमानिक देव

(d) भवनवासी देव

(e)उपरोक्त सभी

Ans, उपरोक्त सभी


2. कौन से प्रकार के देव मनुष्यों की सहायता नहीं करते ?

(a) ज्योतिषि देव

(b) महादेव

(c) वैमानिक देव

(d) भवनवासी देव

Ans: महादेव

3. जीवो को सुख दुख होने का प्रबल कारण है,

(a) धन

(b) मकान

(c) पुत्र

(d) अपने कर्म का उदय

Ans अपने कर्म का उदय

 रिक्त स्थान भरें -


(a) जीवों के कर्म के उदय के अनुसार ________ बनते हैं ।

उत्तर _ बाह्य निमित्त

(b) जिस जीव का पापोदय हो उसे देवादिक के द्वारा ______का निमित्त नही बनता। 

 उत्तर _सहाय

(c)जिस जीव का पुण्योदय हो उसे देवादिक के द्वारा ______का निमित्त नहीं बनता।

उत्तर _ दण्ड

 सत्य | असत्य कथन -


(a) देवादिक अपने छयओप सम ज्ञान से सबको युगपत् जान सकते हैं।

उत्तर _असत्य कथन

(b) तीव्र कषाय हो तो धर्मानुराग नहीं हो सकता।

 उत्तर _सत्य कथन

(c) देवादिक किसी जीव के पुण्य का उदय होने पर भी उसे दण्ड दे सकते हैं। 

उत्तर _असत्य कथन

 संक्षिप्त उत्तर -


ऐसे निमित्त जब देवादिक किसी जीव के सहाय हो या दण्ड देने के कारका हो___

:देवादिक छ योपसम ज्ञान से सबको युगपत् नहीं जान सकते अत्एव किसी जीव के मंगल करने अथवा न करने का ज्ञान देवादिक को एक ही काल में हो ऐसा संभव नहीं।

:यदि देवादिक अपने ज्ञान में जानेंगे ही नहीं तो जीव को सहाय या दण्ड देने के कारक कैसे हो सकेंगें।

Notes Written By Shreni Jain.

Class Date: 31-10-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 18
Paragraph #: 1 & 2(half)
YouTubelink: https://www.youtube.com/live/SHUfGs2AxnY?si=K2pO6YUV8i1jALYn
Summary:

True/False -

Q.1 शास्त्र सुनने से हमारा भला होता है?

Ans- True

Q.2 अगर मंदबुद्धि के कारण कोई शास्त्र को ज्यादा समझ नहीं पा रहा है तो उसे पूर्ण बंद बंधेगा?

Ans- True

Q.3 क्या श्रोता केवल ज्ञानी होता है?

Ans - True

Q.4 प्रवचन कैसा होना चाहिए , श्रोता जैसा?

Ans - True

Q.5 जो आत्मज्ञान को जानता है वह अच्छा श्रोता है?

Ans - True

Q.6 अतिशयवंत बुद्धि से और जो मनः पर्यय ज्ञान से सहित होते हैं वह विशेष श्रोता कहलाते हैं?

Ans - True

Q.7 अधिक मंदबुद्धि के कारण से विशेष कार्य की प्राप्ति सिद्ध नहीं हो पाती है?

Ans - True

Multiple Choice Questions -

Q.8 बुद्धि रिद्धि कितने प्रकार की होती है?

A. 6
B. 10
C. 18
D. 20

Ans - (C) 18

Q.9 विशेष कार्य किसे कहते हैं?

A. रत्नत्रय 
B. मिथ्यत्व 
C. पांच पापों में प्रवृत्ति
D. इनमें से कोई नहीं

Ans- (A) रत्नत्रय 

Q.10 इतिहास किसे कहते हैं?

A. भूतकाल (past) के बारे में जानना
B. वर्तमान काल (present) के बारे में जानना
C. भविष्य काल (future)के बारे में जानना
D. सभी के बारे में जानना
E. इनमें से एक भी नहीं

Ans - (A) भूतकाल (past) के बारे में जानना

Question & Answer -

Q.11 व्याकरण किसे कहते हैं?

Ans - भाषा के नियम ,  लिंग और शब्द की उत्पत्ति को व्याकरण कहते हैं।

Q.12 बड़े बड़े शास्त्र कौन से हैं?

Ans - समयसर , धवल , महाधवाल 

Notes Written By Bhumi Doshi.

Class Date: 1-11-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 18
Paragraph #: 2(half) 3 & 4
YouTube link:https://www.youtube.com/live/F5SKjZ0INAI?si=Ah3YTx5g-7plGTwR
Summary:

 वस्तुनिष्ठ प्रकार-


(1) 'विशेष कार्य सिद्धि होना' से पंडित जी का क्या तात्पर्य है?

A) आत्म तत्व की प्राप्ति होना।

(B) राग भावो में वृद्धि होगा।

C) संसार भला लगना

(D) पुण्य बंध ही भला है

उत्तर (D)

(2) जीव शास्त्र सुनते तो हैं किंतु अवधारण नहीं करते, तो कारणक्या है? 

a) कुल प्रवृत्ति से सुनना

b) पद्धति बुद्धि से सुनना

c) सहज योग बनने पर सुनना

d) उपरोक्त सभी

उत्तर:- (d)

(3) पुण्य बंध व पाप बंध किनका अनुसरण करते हैं?

a) जीव की क्रियाओं का

b) जीव के परिणामों का

c) दोनों नहीं

उत्तर - (b)

(4) किन भावों/ परिणामों से शास्त्र सुनते समय भी पाप बंध ही होता है।

a) मदमत्सर भावों से सुनने से
b) महंतता के हेतु से
c) लोभादिक के प्रयोजन से 
d) उपरोक्त सभी

उत्तर:- (d)

संक्षिप्त उत्तर प्रकार-


(1) जो कल्याण की भाषा से शास्त्र सुनते है प्रायः उनके परिणाम कैसे होते है?

उत्तर:- संभले हुऐ / शुभ भाव

(2) शास्त्र नहीं 'सुहाता' है का क्या अर्थ है?

उत्तर- सुनते समय आनंद न आऐ, प्रवचन काम का न लगे आदि।

(3) उचित शास्त्र किसे कहते हैं?

उत्तर - जो वीतरागता के पोषण करने वाले हो, जिसमें मोक्ष मार्ग कों प्रशस्त करने की बात हो।

(४) उचित वक्ता किसे कहते हैं?

उत्तर:- जो जैन धर्म का श्रद्धानी हो, तत्वाभ्यासी हो, प्रयोजन को जानने वाला हो व लोक निंद कामों का त्यागी हो।

(v) उचित श्रोता कैसा होता है?

उत्तर- आत्म कल्याण की भावना से सुनने वाला उचित श्रोता होता है।

(vi) डांस मच्छर व चलनी किस तरह के श्रोता के दृष्टांत है?

उत्तर- निकृष्ट (निम्न श्रेणी) के श्रोता के दृष्टांत है।

(vii) अच्छे श्रोता किस तरह के होते है?

उत्तर - मिट्टी जैसे होते है, जिनवाणी रूपी जल के सिंचन से कुछ समय के लिए भीग जाते हैं।

(viii) उत्तम श्रोता के दृष्टांत दीजिए ?

उत्तर - हंस के समान भेदज्ञानी और

गाय के समान - थोड़ा सुनकर बड़ा गुनने वाले।

Notes Written By Nidhi Jain.