Monday, January 15, 2024

Class Date: 10-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 36 & 37 
Paragraph #: 2 (pg. 36)  & 1 (pg. 37)
YouTube link: 
Summary:
Class Date: 5-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#:
Paragraph #:
YouTube link: https://www.youtube.com/live/YeD0cLkn4cc?si=cnEzFtMdnWLlB3IM
Summary:

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए -


1.मतिज्ञान —------ ज्ञान हैं।

उ.पराधीन

2. मतिज्ञान के द्वारा —---- पदार्थों को जाना जाता है

उ.रूपी

3. मतिज्ञान के द्वारा मात्र —----- काल को जाना जाता है

उ.वर्तमान

4. मति ज्ञान के द्वारा मात्र —--- भावो को जाना जाता है।

उ.स्थूल

5. मति ज्ञान के माध्यम से —---- से जाना जाता है।

उ.क्रम क्रम

एक शब्द में उत्तर दीजिए-


1. मन द्वारा कैसा जाना जाता है?

उ. अस्पष्ट

2. मन कौन से दोनों पदार्थों को जानता है?

उ. रूपी अरुपी

3. काल द्रव्य की पुद्गल पर्याय क्या है?

उ. घंटा घड़ी

4. मन की गति कैसी होती है?

उ. अचिन्त्य

5. इंद्रियों के द्वारा जानने का क्षेत्र कितना है?

उ.9 योजन

सही गलत में उत्तर दीजिए

1. मन सारे द्रव्य क्षेत्र कल को जानता है?

उ.सही

2. मन पर भावों को स्पष्ट जानता है?

उ. गलत

3. मन मात्र इंद्रियों द्वारा ज्ञान या अनुमान किया जा सकता है उसे ही जान सकता है?

उ. सही

4. कीड़े मकोड़े 3 इन्द्रिय होते हैं?

उ.सही

5. पृथ्वी जल ध्वनि वायु वनस्पति की एक कोई सी भी इंद्री ही होती है?

उ.गलत

Notes Written By Neha Gangwal.


Class Date: 9-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 35 & 36
Paragraph #: 4 , 5 , 6   
YouTube link:  https://www.youtube.com/live/TIjwKQV0Q14?si=G7jbiyO8-4qRH-aq
Summary:


रिक्त स्थान


1. दर्शन ......प्रकार के होते है

उत्तर- चार

2. मतिज्ञान से पहले पदार्थों का सामान्य प्रतिभास होना .....गुण है।

उत्तर - दर्शन

3. चक्षु इन्द्रिय द्वारा हुए मतिज्ञान के पहले जो दर्शन (प्रतिभास) हो उसे.... दर्शन कहते है।
 
उत्तर- चक्षु दर्शन

4. स्पर्शन रसना घ्राण कर्ण और मन के संबंध हुए, मतिज्ञान के पहले जो दर्शन हो उसे .......दर्शन कहते हैं।

उत्तर- अचक्षु दर्शन

5. ज्ञान और दर्शन के परिणमन को ..... कहते है।

उत्तर - उपयोग

6. ज्ञान और दर्शन की शक्ति को .....कहते है।

उत्तर - लब्धि

7. ज्ञान के माध्यम से कार्य करने को......कहते है

उत्तर - ज्ञानोपयोग

8. दर्शन के माध्यम से कार्य करने को ....... कहते है।

उत्तर - दर्शनोपयोग

सही / गलत -


1. दर्शनगुण, पदार्थों का सत्तामात्र अवलोकन करता है

Ans-  (√)

2. चार इन्द्रिय और पंच इन्द्रिय जीवो के चक्षु दर्शन होता है 

Ans- (√)

3. केवल दर्शन मोक्षस्वरूप है और केवली के होता है 

Ans- (√)

4. केवल दर्शन स्वतन्त्र नहीं है 

Ans- (x)

5. अवधिज्ञान होने के पूर्व अवधि दर्शन होता है 

Ans- (√)
 
6.ज्ञान और दर्शन की शक्ति क्षयोपशम पर निर्भर नहीं करती है 

Ans- (x)

7. एक जीव को एक समय में एक प्रकार का उपयोग होता है 

Ans-  (√)

प्रश्न/उत्तर


1. दर्शन का अर्थ क्या है?

उत्तर - सामान्य प्रतिभासना

2. उपयोग कितने प्रकार का होता हो?

 उत्तर-उपयोग दो प्रकार का होता है।
         1. ज्ञानोपयोग
         2. दशनोपयोग

3. दर्शन कितने प्रकार का होता है ? 
 उत्तर - दर्शन चार प्रकार का होता है।
         1 चक्षु दर्शन
         २. अचक्षु दर्शन
         3. अवधि दर्शन
         4. केवल दर्शन


Notes Written By Kritika Jain.

Class Date: 8-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 35
Paragraph #: 1 & 2 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/5C2E6ZD03qw?si=hNOvOXL3TGICluAI
Summary:

 अवधिज्ञान के संबंध में इनमें से कौन सा वाक्य सही है 


a) अवधिज्ञान रूपी को जानता है✅ / अरुपी को जानता है।

b) स्पष्ट जानता है। ✅/ अस्पष्ट जानता है।

c) इन्द्रियों और मन से जानता है/ आत्मप्रदेशों से जानता है।✅

d) क्षेत्र,‌ काल की मर्यादा के साथ जानता है ✅/ अमर्यादित ज्ञान है।

e) क्रमिक ज्ञान है ✅/ युगपत् ज्ञान है।

अवधिज्ञान ज्ञान के स्वामी कौन हैं


a) देव, नारकी :- सभी ✅ / किसी-किसी को/ पाया ही नहीं जाता

b) संज्ञी तिर्यंच, मनुष्य:- सभी / किसी-किसी को ✅ । पाया ही नहीं जाता

c) एकेन्द्रिय से असंज्ञी पंचेन्द्रिय तिर्यंच :- सभी / किसी-किसी को / पाया ही नहीं जाता✅

True/false


a) निमित्तज्ञान और अवधिज्ञान एक प्रकार के ही ज्ञान है।

Ans-(f)

b) अवधिज्ञान अपनी मर्यादा के साथ पुदगल द्रव्य को उसके असंख्यात गुण सहित जानता है।

Ans- (t)

c) अवधिज्ञान सीधे आत्म प्रदेशों से जानता है अतः पराधीन नहीं हैं।

Ans-(f)

d) स्वस्ति, कलश, मीन, सूर्य, चंद्र आदि शरीरादिक चिन्हों के माध्यम से अवधिज्ञान होता है अतः पराधीन है।

Ans-  (t)

e) सर्वावधि ज्ञान एक परमाणु को भी जान सकता है।

Ans-  (t)

 short answer type Question:-


a) अवधिज्ञान का विषय कौन से रुपी पदार्थ हैं'?

Ans. पुद्‌‌गल द्रव्य, संसारी जीव

b) अवधि ज्ञान की क्या range है?.

Ans. एक परमाणु से लेकर महास्कंध तक के परमाणु को जानना अधिज्ञान की range है।

c) अवधिज्ञान का कौन सा प्रकार चारों गतियों के जीवों को हो सकता है।

Ans. देशावधि ज्ञान

d) मोक्षमार्ग में कौन से अवधि ज्ञान हो सकते हैं'?

Ans. परमावधि और सर्वावधि

e) मनःपर्यय ज्ञान के स्वामी कौन से जीव हैं?

Ans. मोक्षमार्गी आत्मानुभवी महामुनिराज ही मनःपर्यय ज्ञानी हो सकते हैं।

f) क्या संसार अवस्था में केवलज्ञान का सद्‌भाव पाया जाता है?

Ans. शक्ति की अपेक्षा हाँ, लेकिन व्यक्ति की अपेक्षा नहीं क्योंकि केवलज्ञान मोक्षरूप है।

Notes Written By Nidhi Jain.

Tuesday, January 9, 2024

Class Date: 26-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 31&32
Paragraph #: 1,2,3,4
YouTube link: https://www.youtube.com/live/qRpo-guXdKo?si=c47QoSI0r2PtJF4D
Summary:

 FILL IN THE BLANKS 


1) निगोदिया जीव के संदर्भ में: 
_____ शरीर और उसमें रहने वाले जीव _____।

Ans - असंख्यात , अनंत

2) निगोदिया जीव की _____ इन्द्रिय होती है।

Ans - 1 (स्पर्शन)

3) _____निगोदिया जीव सर्व‌त्र ठसा - ठस भरे हैं।

Ans - नित्य (सूक्ष्म)

4) _____काल से जीव नित्य निगोद में पाया जाता है।

Ans - अनादिकाल 

 TRUE/FALSE 


1) निगोदिया जीव को सुख दुख का अनुभव नहीं होता है।
 
2) 6 महीने 8 समय में 608 जीव इतर निगोद से निकलते हैं।

3) सिद्ध शिला में निगोदिया जीव नही पाए जाते है।

4) कोई जीव नित्य निगोद से निकलकर सीधा मनुष्य पर्याय को धारण कर सकता है।
✔️

ANSWER IN ONE WORD


1) निगोदिया जीव कौन सी गति के जीव है❔

Ans - तिर्यंच गति

2) जीव अनादि काल से कहा पाया जाता है❔

Ans - नित्य निगोद में

3) नित्य निगोद से जीव निकालकर किन-किन पर्यायों को धारण करता है❔

Ans - 1,2,3,4,5 इंद्रियां (साधारण वनस्पति को छोड़कर)

4) एक इन्द्रिय में से कौन से प्रकार में निगोदिया जीव पाए जाते हैं❔

Ans - वनस्पतिकाय में

VERY SHORT ANSWER 


1) निगोद किसे कहते हैं❔

Ans - एक शरीर में अनंते जीव एकमेक होकर रहते हैं उसे निगोद कहते हैं।

2) निगोद कितने प्रकार के होते हैं❔

Ans - दो प्रकार के होते है:-
नित्य निगोद
इतर निगोद ।

3) जीव को किसने पैदा किया है❔

Ans - जीव को कोई पैदा नहीं करता और वह पैदा भी नहीं होता है और उत्पन्न नहीं होता तो उसका नाश भी नहीं होता है।

4) इतर निगोद किसे कहते हैं❔

Ans - जो जीव नित्य निगोद से निकल कर और अन्य पर्यायों में (एक दो तीन चार पांच ) इन्द्रियो को धारण करते हैं, चारो गतियों में परिभ्रमण करते है और यदि उनकी मुक्ति नही होती तो पुनः निगोद को प्राप्त होते हैं और उस निगोद को कहते हैं इतर निगोद।

Notes Written By Khushi Jain.

Friday, January 5, 2024

Class Date: 28-12-23
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 32
Paragraph #: 1, 2, 3 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/wmi7MPQvgcw?si=RQJhvWxT-cA0M-AU
Summary:

रिक्त स्थान भरे   

1. स्थावर पर्याय (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, प्रत्येक वनस्पति) मै रहने का _____ उत्कृष्ट काल होता है। 

उ. असंख्यात कल्पकाल 

2. १ कल्पकाल का समय ____ सागर का होता है। 

उ. २० कोड़ा कोड़ी 

3. कोड़ा कोड़ी मतलब ______X________ | 

उ. करोड़, करोड़    

4. त्रस पर्याय मै रहने का उत्कृष्ट काल _____ होता है। 

उ. साधिक २००० सागर 

5. इतर निगोद मै रहने का उत्कृष्ट काल _____ होता है।

 उ. ढाई पुद्गल परवर्तन 

6. नित्य निगोद मै रहने का उत्कृष्ट काल _____ होता है।

 उ. अनादि अनंतकाल 

7. एक इन्द्रिय पर्याय मै रहने का उत्कृष्ट काल _____ होता है।

उ. असंख्यात पुद्गल परावर्तन 

8. बड़े ना राशि_____, घटे न जीव______, जैसी की तैसी रहे, यह _______विनोद | 

उ. अनंतता,निगोद, जिनवचन 
9. एक इन्द्रिय पर्याय की अपेक्षा अन्य पर्याय प्राप्त करना _____ के सामान है | 

उ. काक-तालिय-न्यायवत  

उत्तर लिखिए 


1. एक इन्द्रिय पर्याय मै रहने का उत्कृष्ट काल असंख्यात पुद्गल परावर्तन कैसे होता है? 

उ. कोई इतर निगोदिया जीव ढाई पुद्गल परावर्तन का उत्कृष्ट काल बिताकर, फिर पृथ्वीकायिक आदि स्थावर पर्याय मै उत्पन्न हो, वह कुछ काल बिताकर वापस इतर निगोद पर्याय मै आये, वहां फिर ढाई पुद्गल परवर्तन का उत्कृष्ट काल बिताकर दोबारा किसी स्थावर पर्याय को प्राप्त हो, ऐसा असंख्यात बार परिभ्रमण करते हुए एक इन्द्रिय पर्याय मै उत्कृष्ट काल असंख्यात पुद्गल परावर्तन बिताया जा सकता है | 

2. वह ६०८ कोनसे जीव होते है, जो नित्य निगोद से निकलते है? 

उ. जीव के भाव और भाग्य दोनों ही कारण बनते है | 

3. जब एक समय मै ६०८ जीव मोक्ष जाते है तोह शिखरजी की टोंक से इतने कोड़ा-कोड़ी मुनि मोक्ष कैसे गए?

उ. वह एक समय की संख्या नहीं है, परन्तु पुरे चतुर्थ काल के अलग-अलग समयो मै मुक्त हुए जीवो का जोड़ है |  

4. १७/३ कितना होता है? 

उ. 5.666666666666666666666666666666666666666666666-अनंत बार ६ |

5. त्रस पर्याय मै रहने का जघन्य काल क्या है? 

उ. एक अन्तर्मुहूर्त काल, मतलब ४८ मिनट से कम | 

6. काक-तालिय-न्यायवत का क्या मतलब है? 

उ. कोई व्यक्ति ताली बजाए, तोह उस ताली की तरंग से कोई आम पेड़ से गिरे और उसी समय कोई कौआ वहां से निकले और वह आम उसकी चौच मै आ जाए | इसी तरह ही मुझे यह वर्तमान जीवन प्राप्त हुआ है | 

7. यह सब काल परिभ्रमण जानने से मुझे क्या सीख मिली?
 
उ. मै अनन्तो जीवो मै से वह जीव हूँ, जिसे यह दुर्लभ त्रस पर्याय, मनुष्य गति, उत्तम कुल, सत-संगती प्राप्त हुई है, मुझे संसार के सभी सुख मिले है, जिन्हे मै दुःख कहता हूँ, वास्तव मै वे निगोदिया आदि जीवो की अपेक्षा पहाड़ के सामने राइ बराबर भी नहीं है, अगर मुझे कोई दुःख है तोह वह इस संसार मै परिभ्रमण का दुःख है, जन्म-जरा-मृत्यु का ही एक मात्र मुझे दुःख है | 

सही/गलत लिखिए 


1. ऐसे भी अनंते जीव है जो आज तक निगोद के अलावा किसी अन्य अवस्था को प्राप्त नहीं हुए है | 

Ans- सही 

2. हर ६ महीने ८ समय मै निगोद से ६०८ जीव अन्य पर्याय को प्राप्त होते है | 

Ans- सही 

3. हर ६ महीने ८ समय मै संसार से ६०८ जीव मुक्त होते है | 

Ans- सही 

4. ज्योंकि हर ६ महीने मै जीव मुक्त हो रहे है, तोह संसार जीव राशि अनंत काल बाद ख़तम हो जाएगी |

Ans-  गलत, १ और २ के बीच मै अनंत संख्या 

5. ज्योंकि हर ६ महीने मै निगोद से ६०८ जीव निकलते है, तोह अनंत काल बाद निगोद राशि ख़तम हो जाएगी | 

Ans- गलत, १ और २ के बीच मै अनंत संख्या 

6. तीन काल मै भी एक निगोद शरीर के भी जीव निगोद पर्याय से बहार नहीं निकलते है |

Ans- सही 
7. क्या कोई जीव निगोद से निकलकर १ सेकंड के लिए मनुष्य पर्याय को प्राप्त कर वापस निगोद मै जा सकता है?

Ans-  हा  

8. मुहूर्त मतलब ४८ मिनट | 

Ans- सही 

9. अन्तर्मुहूर्त मतलब ४८ मिनट से ज्यादा समय | 

Ans- गलत, ४८ मिनट से कम को अन्तर्मुहूर्त कहते है | 

10. जैसे सागर मै एक बूँद होती है वैसे ही एक इन्द्रिय पर्याय से त्रस पर्याय का धारण होना होता है |

Ans-  सही     

Notes Written By Ayushi Jain.


Class Date: 4-1-24
Chapter: दूसरा अधिकार 
Page#: 34
Paragraph #: 2 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/W-6iop5M8I4?si=yaXeBxN8g5CuqxZ-
Summary:


 सही ग़लत बताओ


1. ज्ञान वरण कर्म के पं|च प्रकार हैं|

सत्य

2. मन ज्ञान इन्द्रिय ज्ञान से विशिष्ट ज्ञान है।

सत्य

3. इंद्रियों से 6;द्रव्यों का ज्ञान होता है|

असत्य

4. मति श्रुत ज्ञान सभी संसारियों को होता है|

सत्य

 एक शब्द में उत्तर दिजिये 


1.इंद्रिय ज्ञान कौन सा ज्ञान होता है?

उत्तर- पराधीन ज्ञान

2. इंद्रियों से कौन सा द्रव्य संबंध ज्ञान होता है?

उत्तर - पुद्गल द्रव्य संबंधि

3. क्या इंद्रियों द्वारा सूक्ष्म ज्ञान होता है?

उत्तर- नहीं 

4. मन के द्वार त्रिकाल संबंधित ज्ञान कितना होता है?

उत्तर - किंचित मात्र 

 सही विकल्प चुने


1. कौन सा ज्ञान पराधीन ज्ञान नहीं है?

केवलज्ञान
 मन:पर्यय
अवधी ज्ञान

उत्तर - केवलज्ञान 

2. ज्ञान|वरण के कितने प्रकार होते हैं?

तीन 
पांच 
आठ 

उत्तर - पाँच 

3. इंद्रियों के अधीन कैसा ज्ञान होता है?

सर्वज्ञ 
सूक्ष्म 
आस्पष्ट

उत्तर -अस्पष्ट

 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए


1. इंद्रिय जनित ज्ञान का एक मूल सिद्धांत क्या है?

उत्तर - इंद्रिय जनित ज्ञान का एक मूल सिद्धांत है कि हम एक समय में एक ही इंद्रियों के द्वार| ज्ञान कर सकते हैं सभी इंद्रियों से ज्ञान एक साथ नहीं किया जा सकता है|

2. मति-श्रुत ज्ञान किस प्रकार का ज्ञान है?

उत्तर - मति श्रुत ज्ञान इन्द्रिय जनित ज्ञान है, इस ज्ञान को करने के लिए इन्द्रियों का होना आवश्यक है अत: मति श्रुत ज्ञान पराधीन, परोक्ष, और अस्पष्ट ज्ञान है|

3. क्या मति श्रुत ज्ञान एक साथ होता है?

उत्तर - नहीं, मति श्रुत ज्ञान एक साथ नहीं होता है|
किसी वस्तु को जानना मति ज्ञान है और उस वस्तु के बारे में विशिष्ट जनना श्रुत ज्ञान है|

Notes Written By Samta Jain.