Thursday, October 19, 2023

Class Date: 14-10-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 10-11
Paragraph #: pg no. 10 (3) & pg no. 11 (1)
YouTube link: Summary: https://www.youtube.com/live/fdVagjqhuFk?si=rLR2dycnG1ajD67W

 सही गलत बताइए -


  1.) भगवान महावीर स्वामी चौथे काल में मोक्ष गए|

 उत्तर-सही

2) जो अक्षरो का सम्प्रदाय है सो स्वयंसिद्ध है।

उत्तर सही

3) इस भरतक्षेत्र में वर्तमान अवसर्पिणी काल नहीं है,

 उत्तर गलत

 रिक्त स्थान की पूर्ति करें -

 1.) गणधर देव------ ग्रंथ गूथते है।

उत्तर - अंगप्रकीर्णरूप

2) दिव्य ध्वनि को------ने सुना

उत्तर -गौतम गणधर


3.) अक्षरो से उत्पन्न सत्यार्थ के प्रकाशक ----------उनके समूह का नाम--------हैं

उत्तर- पद 'श्रुत'

सही विकल्प चुने -

1.) अंतिम तीर्थकर, अरिहंत अवस्था में कितने दिन तक दिव्य ध्वनि के साथ रहे।  
            
 अ.42वर्ष 
 ब.30 वर्ष वर्ष
 स.40 दिन
 द.45 दिन

उत्तर (ब) 30 वर्ष 

2.) पंचमकाल में अनुबद्ध केवली हुए।

(अ)-गौतम
(ब) सुधर्माचार्य
(स) जम्मूस्वामी 
(द) तीनो

उत्तर-(द) तीनो 

3-वेदान्तो के काल में ग्रन्थो की होली जलाई गई।

(अ) 6 माह
(ब) 1 वर्ष
(स) 2 माह
(द) 5 माह

उत्तर- (अ) 6 माह

एक शब्द में उत्तर दो-


1.) उत्तर सबसे पहला शास्त्र लिखा गया ।

उत्तर-षडखंडागम

2-)अकारादि अक्षर है वे 'किसी के किये गए नहीं है

उत्तर-अनादिनिधन 

3.) भगवान महावीर स्वामी कौन से काल में मोक्ष गए

उत्तर ,-चौथे काल मैं

 संक्षिप्त उत्तर दो -

1) श्रुत केवली किसे कहते हैं?

उत्तर- जो दादशांग के सम्पुर्ण श्रुत के ज्ञाता होते है। जिनको सम्पूर्ण श्रुत (आगम,) का ज्ञान होता है

2.) अवसर्पिणी काल किसे कहते है?

उत्तर जो समय चल रहा है । उसमें चीजे घटती हुई जाती है। जैसे लोगों की आयु, बुद्धि, ऊंचाई लौकिक सुख सम्पत्ति घटती हुई चली जाती है। ऐसा जो काल का प्रवाह रहता है। उसे अवसर्पिणी काल कहते हैं।

 जोड़ी बनावें -

1) अनुबद्ध केवली       a)कुन्दकुन्दस्वामी

2.) अंतिम केवली        b) जिनवाणी

3.) अंतिम श्रुतकेवली   c) श्रीधर केवली

4.) द्वादशांग                d) अमृतचंद्र आचार्य

5.) पंचअस्तिकाय         e) तीन

6.) तत्वसार                  f) भद्रबाहु

उत्तर (1) (E)

(2)- (C)

(3)-(F)

(4) (B)

(5) (A)

(6)-(D)


महावीर स्वामी पर टिप्पणी लिखिए -


महावीर स्वामी:- उन्होंने 30 वर्ष कीउम्र में दीक्षा ली ।फिर 30 वर्ष तक बिहार किया 12 वर्ष तक तपस्या की अरिहंत हुए भगवान हुए केवलज्ञानी हुए।जीवो का कल्याण किया । अरिहंत अवस्था में दिव्यध्वनि के साथ 30 वर्ष तक रहे । 72 वर्ष की आयु में पावापुरी से मोक्ष गए ।श्री वर्धमान नामक अंतिम तीर्थकर देव हुए। अंतिम . शासन नायक दिव्याध्वनि उपदेशक जिनका वर्तमान में शासन चल रहा है। वे तो मोक्ष में चले गए लेकिन जो उन्होंने दिव्यध्वनि से बताया था।, वह आज भी लोग सुनते पढ़ते वाचते ध्याते है । इसलिए उनका शासन चल रहा है।और जब तक धर्म प्रवाहित रहेगा तब तक चलता रहेगा और तव तक उनका शासन (उपदेश) रहेगा। उन्होंने केवलज्ञान से विराजमान होकर दिव्यध्वनि के द्वारा जीवो को उपदेश दिया।

Notes Written By Priyanka Godha.

Class Date: 17-10-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 11&12
Paragraph #: pg no. 11 (4) & pg no. 12 (1-5)
YouTube link:  https://www.youtube.com/live/FAB6VAekNyg?si=Lf3hlXIACzYesoCQ
Summary:

एक शब्द में उत्तर दे-

1.सत्यार्थ का क्या अर्थ हैं?

उ. शूद्ध अर्थ

2.असत्यार्थ पद की रचना बिना किसके नहीं हो सकती?

उ.तीव्र कषाय

3. मूल उपदेश दाता कौन है?

उ. तीर्थंकर केवली

4. सेती मतलब क्या होता है?

उ. 7

5. गणधर आचार्य की कषाय कैसी होती है?

उ. जल पर खींची रेखा के समान

सही गलत में उत्तर दो-

1. तीव्र कषाई जेनी होता है?

उ. गलत

2. जो भगवान अरहंत के भक्त हैं वे विषय कषाय नहीं जानते?

उ.सही

3. जिन्हें सब धर्म में विश्वास है वे श्रधानी गृहस्थ है?

उ.गलत

4. होली दशहरा जिन धर्म का त्यौहार है?

उ.गलत

5. जिन आजा भंग करने का भय होगा वहीं जिन श्रधानी होगा?

रिक्त स्थान की पूर्ति करो

1. नैवेद्य का अर्थ —--- होता है|

उ.खाद्य सामग्री

2. गणधर आचार्य —-–-------- परिग्रह के त्यागी होते हैं।

उ.अंतरंग व बहिरंग

3. —----- में कषाय करने से —-------- करके कषाय करना बड़ा पाप है|

उ.मोह के उदय,जिन आज्ञा भंग

4. सम्यक दृष्टि श्रावक को —----------- में दृढ़ श्रद्धा होता है।

उ.देव शास्त्र गुरु

5. जिन धर्म —------ का नाश करने वाला है।

उ.सर्व कषाय उ.सही

Notes Written By - Neha Gangwal.



Class Date: 18-10-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 13
Paragraph #: 1, 2 & 3
YouTube link:  https://www.youtube.com/live/yu31BfBQp3g?si=JAaLofTCTbolgX5X
Summary:

Fill in the blanks -

 a) असत्य बोलने के दो कारण है ‐-----और‐----।

उत्तर- अज्ञान,कषाय 

b) क्षयोपशम ज्ञान------ ज्ञान है। 

उ . अपूर्ण


c). गणधर देव साक्षात केवली का उपदेश सुनते हैं उसके अतिशय से------ ही भासित होता है।

 उ.- सत्यार्थ


d) आचार्यों को जिन पदों का ---- नहीं होता उनकी तो वे रचना ही नहीं करते।

उ.- ज्ञान 

True/False 


A) सभी अनुयोगों मे देव-गुरु-धर्म व 7 तत्वों का यथार्थ "कथन नहीं है।

 Ans- F 

B) क्या यह संभव है कोई कषाय से नहीं, अज्ञान से असत्यार्थ पद की रचना करे।

Ans- T

C) असत्यार्थ पदो की परंपरा चलती है।

 Ans- F

D) धरती स्थिर नहीं सूर्य के चारों ओर घूमती इस बात का श्रद्धान सम्यक दृष्टि को मिथ्यात्व में डाल सकता है। 

Ans- F


Short answer type question-


A)गणधर देव को कितने ज्ञान होते हैं?

Ans :- 4 ज्ञान होते हैं - मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधि ज्ञान, मनपर्यय ज्ञान।

B) गणधर देव कितने ऋद्धि के धारी होते हैं? 

Ans:- 63 ऋद्धियों के धारी हो सकते है। केवलज्ञानको छोड़कर - 63 ऋद्धियाँ हो सकती है। 

C) किन विषयों की अन्यथा जानकारी से जीव का बुरा हो सकता है?

Ans:- देव-गुरु -धर्म और 7 तत्वों की जानकारी।

D) जैन भूगोल का अस्पष्ट ज्ञान सम्यक्दर्शन की प्राप्ति में बाधक नहीं हैं क्यों?

Ans:- ये प्रयोजन भूत तत्व नही है देव-गुरु-धर्म, 7 तत्वों का सच्चा श्रज्ञान ही स. दर्शन का कारण है।

Notes Written By - Nidhi Jain.


Tuesday, October 17, 2023

Class Date: 16-10-23
Chapter: पहला अधिकार
Page#:  11
Paragraph #: 2 
YouTube link: https://www.youtube.com/live/RxnGGuAURgc?si=80BssJjp0TU_wy4K
Summary: 

  सही गलत -

Q.1 जैन धर्म मिलना , मंदिर आना , स्वाध्याय करना , दर्शन करना क्या संस्कार है?

Ans- हां।

Q.2 क्या काल दोष से कुछ ग्रंथो का नाश हुआ हैं?

Ans - हां।

Q.3 समाधि भक्ति के रचियता पंडित जयचंद जी छाबड़ा हैं?

Ans- नहीं।

सही विकल्प चुनें - 

Q.4 पहले के लोग पूजा पाठ केसे करते थे ?
 a. सुन-सुन के 
b. याद कर के
C. मंद कषाय से
d. उपरोक्त सभी

Ans- D(उपरोक्त सभी)

Q.5 पंडित टोडरमलजी की आयु कितनी थी?
a. 58 years
b. 47 years
c. 35 years
d. इन मै से कोई भी नही

Ans- B(47 years)

एक शब्द मै उत्तर दो - 

Q.6 कथा पुराण का नाम बताइए

Ans- पद्मपुराण

Q.7 भारतीय दर्शन कितने प्रकार के बताए है?

Ans- 6 दर्शन 

Q.8 जिनवाणी को प्रवाहित करने वाले कोन है?

Ans- केवली भगवान

Q.9 जैन रामायण कितने प्रकार की बताई है?

Ans- उन्नीस (19)

Q.10 तनुधि का अर्थ बताइए

Ans- पतली बुद्धि

Notes Written By - Reena Doshi.

Saturday, October 14, 2023

Class Date: 11-10-23
Chapter: पहला अधिकार
Page#: 8
Paragraph #: 4 & 5
YouTube link: https://www.youtube.com/live/5700WAyYZrg?si=ya7OyVIuBeG9obef
Summary: 

खाली स्थान भरो -

1)पूर्वोपर्जित पुण्य बंध के कारण___ किए बिना ही____दिखाई देता है।

                  (मंगल,सुख)     

 2)वर्तमान में पाप का उदय दिखाई देने पर भी जीव___
परिणामी हो सकता है। [ विशुद्ध ] 

3. पाप का उदय दिखने पर भी मंगल_____का ही कारण होता है।
[ सुख ] 

 हाँ या नहीं मे उत्तर दो -


1 )जीव के विशुद्ध परिणाम एक और अनेक जाति के हो सकते है। [ ] 
 उत्तर- नहीं 

2) जीव के संक्लेश परिणाम कषाय की मंदता से सम्बन्धित होते हैं। [ ] 
 उत्तर  -  नही 

3.) अनेक कालों में पहले बंधे हुए कर्म एक काल में कभी
उदय में नहीं आ सकते।( )
           उत्तर  -  नही 


4) किसी भी कार्य की सिद्धि पूर्व में किये गये पुण्य व पाप कर्मों के बन्ध पर निर्भर हैं। []   
उत्तर। -हां 

5) मंगलाचरण नहीं करने पर भी कार्य की निर्विघ्न समाप्ति हो सकती है। [ ] 
उत्तर - हॉ

एक शब्द मे उत्तर दो -


1 ) अनेक कालो में पहले बँधे हुए कर्म कब उदय में आते है ?
 उत्तर - एक काल मे

2 )पूर्व में किये पाप बंध के कारण वर्तमान में अत्याधिक पुरुषार्थ करने के बाद भी क्या दिखाई पड़ता है?

 उत्तर - ऋण / धन हीनता की स्थिति ।

बहुविकल्पीय प्रश्न -


1. किसी मंगल कार्य करने से पूर्व मंगलाचरण न क पर भी सुख की प्राप्ति हो जाती है-

अ] हमेशा

[व] कभी नहीं

स] पूर्व पुण्य बन्ध के कारण 

 [द] पूर्व पाप बन्ध के कारण

  उत्तर - (स) 

2 संक्लेश परिणामो की जाति के प्रकार है-

(अ) एक

ब) दो

(स) अनेक

द) से सभी

 उत्तर : [ स ]

(3) विशुद्ध परिणामो से होता है। 

(अ) पुण्य बंध

 (ब) पाप  बंध

(स) कषाय की तीव्रता
 
(द) ये सभी          

 उत्तर - (अ) 

टिप्पणी  लिखो -


(१)  मंगल सुख का कारण हैं
 मंगल की कामना सहित कार्य करने से 
▶️ परिणामों में विशुद्धि बढ़ती है, 
➡️पाप कर्मों के संक्रमणादि में निमित्त होते हैं,

 ▶️ इष्ट के स्मरण से सकारात्मकता में वृद्धि तथा
 ▶️ लौकिक व पारलौकिक सुखो की अवश्य ही प्राप्ति होती है।

Notes Written By Pratima Jain.

Class Date: 10-10-23
Chapter: पहला अधिकार 
Page#: 8
Paragraph #: 1 , 2 & 3
YouTube link: https://www.youtube.com/live/4EdAJ3c06xU?si=VoQJtToleqGLJz_y
Summary:
 Q.1 __ ग्रंथ की पूर्णता के लिए मंगलाचरण लिखा जाता है।
Ans- निर्विघ्न
 
2___का दर्शन ___दर्शन का कारण है।
 Ans-  अर्हंतादिक , सम्यक

3   अन्यमति क ग्रंथो मे___भावो का ___ करने विपरीत अर्थो को धरते है।
Ans- मिथ्यात्त्व व कषाय, पोषण

1  सुख से ग्रंथ की समाप्ति मंगल का कारण है 
Ans- हाँ 

2 ) पंच परमेष्ठी मंगल है 
Ans- हाँ 

3  ) क्याविनय करना ही मंगलाचरण का कारण है 
Ans- नही 

4) उत्तम सुख कि प्राप्ति अरिहंतादिक के स्तवन से होति है।
Ans- हाँ 

5)भगवान को नहीं मानना नास्तिकता है। 
Ans- हा

जोड़ी मिलाए - 
1)  सुख                     विषेस ज्ञान  
2)  मं                       मोह      
3) मिथ्यात्व                मंग      
4) वितरागता              तीव्र पाप  
5)संकलेश                पाप        
Ans-  1)3,   2)6,  3)2,   4)1,   5) 4

1) शिष्टाचार क्या है?
उत्तर _ परंपरा बनाए रखना।

2)नास्तिकता क्या है?
उत्तर _  आत्मा को ना मानना।

3) अरिहंत आदि के भक्ति से परिणाम कैसे होते हैं
उत्तर _ विशुद्ध परिणाम।

Notes Written By Rinku Doshi.

Wednesday, March 28, 2018

गोम्मटसार शिक्षण-शिविर IV

गोम्मटसार जीवकाण्ड जैसे दुर्लभ ग्रन्थ का आद्योपांत स्वाध्याय का स्वर्णिम अवसर

गोम्मटसार जीवकांड शिक्षण-शिविर (चतुर्थ)

19 मई से 27 मई 2018

मोदीजी की नसिया, इन्दौर

 

आचार्य नेमीचन्द्र के सान्निध्य में श्रवणबेलागोला में राजा चामुण्डराय के द्वारा 57 फीट उत्तुंग भगवान् बाहुबली की स्थापना स्थापना की गई थी | उन्हीं आचार्य नेमीचन्द्र के द्वारा राजा चामुण्डराय के प्रश्न पर विशाल गोम्मटसार ग्रन्थ की रचना की गयी थी | हम सब श्रवणबेलागोला तीर्थ से परिचित हैं, परन्तु गोम्मटसार से अब भी अपरिचित हैं | आइये, श्रवणबेलागोला के बाद अब हम उन्हीं आचार्य-शिष्य के द्वारा रचित-व्याख्यायित गोम्मटसार को भी जानें |

पिछले दिनों 9 दिवसीय मस्तकाभिषेक के द्वारा श्रद्धालुओं ने 57 फीट उत्तुंग भगवान बाहुबली का अभिषेक किया, अब इस 9 दिवसीय ज्ञान-महाभिषेक के द्वारा हम 57 घंटों तक श्री गोम्मटसार ग्रन्थ का अभिषेक करें | यह गोम्मटसार जीवकांड का अंतिम शिविर है | इसमें शेष रहा पूरा विषय लिया जाएगा | यह अंतिम अवसर है, चूकें नहीं |

 

शिविर की विशेषता :

Ø  इसमें 9 दिनों तक प्रतिदिन सुबह, दोपहर और रात्रि को 2-2 घंटे, इस तरह प्रतिदिन 6 घंटे जीवकांडजी का अध्ययन कराया जाएगा |

Ø  अन्य शिविरों की भांति इस शिविर में विभिन्न ग्रन्थ नहीं लेकर पूरे शिविर में एक ही ग्रन्थ का अध्ययन कराया जाएगा – यह इस शिविर की सबसे ख़ास बात है |

Ø  नवीनतम साधनों जैसे प्रोजेक्टर, टेबल्स आदि के द्वारा अध्ययन कराया जाएगा |

Ø  Software Engineer, विदेशों में सेवायें दे चुके युवा विद्वानों के द्वारा अत्यंत सरल और सुन्दर विधि से पढ़ाया जाएगा |

Ø  आकर्षक नवीनतम स्टडी मटेरियल

Ø  शिविर के बाद भी प्रश्न-पत्रों के माध्यम से ग्रन्थ का अभ्यास चालु रहता है |

 

इस शिविर के विषय

संयम, दर्शन, लेश्या, भव्य, सम्यक्त्व, संज्ञी, आहार, मार्गणा एवं उपयोग प्ररूपणा

 

पूर्व 3 शिविरों में गुणस्थान से लेकर ज्ञान मार्गणा तक अध्ययन कराया गया था | अब इस शिविर में आगे के अधिकारों का अधययन कराया जायेगा | जिन लोगों ने पूर्व शिविरों में भाग नहीं लिया था, वे भी इस शिविर में शामिल हो सकते हैं | इस शिविर के विषय पहले से भी सरल होंगे | देखें क्यों आना चाहिए इस शिविर में : https://www.youtube.com/watch?v=kWxPwZts1e8

 

हर शिविर में 400 से भी अधिक साधर्मीयों ने भाग लिया था एवं विषय को बहुत अच्छे ढंग से सिखा था | आप भी पिछले शिविर के विडियो इस साईट पर देख सकते हैं – www.jainkosh.org

 

शिविर में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है | रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 10 अप्रैल है | रजिस्ट्रेशन करने हेतु आप ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं : https://goo.gl/szV9LP अथवा श्रीमती प्रियंका गोधा, 94794-45253  से संपर्क करें

 

इन्दौर के बाहर से आने वाले शिविरार्थियों हेतु आवास एवं शुद्ध भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था रहेगी | आप इस ज्ञान-यज्ञ में अवश्य आयें और अन्य साधर्मियों को भी जानकारी देवें |

 

- विकास जैन (छाबड़ा)